Kisan Andolan: अन्नदाताओं के ‘मिशन यूपी-उत्तराखंड’ से बीजेपी हलकान

किसान-आंदोलन (Kisan Andolan) में जबर्दस्त उत्साह नजर आ रहा है। दिल्ली के मोर्चों पर किसानों के जत्थों का आना लगातार जारी है और केंद्र सरकार भारी असमंजस में है।

राजनीतिक विश्लेषण

किसान आंदोलन (Kisan Andolan) ने केंद्र व यूपी-उत्तराखंड समेत कई राज्यों में सत्तारूढ़ बीजेपी को हलकान कर दिया है। केंद्र की मोदी सरकार की मंशा पश्चिम बंगाल बंगाल फतह के बाद कोरोना महामारी की आड़ में किसानों का बोरिया बिस्तर समेट देने की थी, लेकिन बंगाल पराजय से उसकी यह रणनीति नाकाम हो चुकी है। अब यूपी-उत्तराखंड समेत चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार की रणनीति किसानों को अन्यत्र उलझाने की है। इस बात को समझते हुए किसान नेतृत्व ने एक बार फिर दिल्ली के मोर्चों पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे पहलर किसानों ने हरियाणा सरकार को एक महींने में दो बार घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया।

Kisan Andolan - Rakesh Tikait

अब इस बार किसान-आंदोलन (Kisan Andolan) में जबर्दस्त उत्साह नजर आ रहा है। दिल्ली के मोर्चों पर किसानों के जत्थों का आना लगातार जारी है और केंद्र सरकार भारी असमंजस में है। आंदोलन से निपटने में एक कदम आगे, दो कदम पीछे वाली रणनीति अपना रही है। टोहाना प्रकरण इसका उदाहरण है। किसानों का कहना है कि मौजूदा दौर में मोदी और शाह के निर्देश पर तैयार की गयी सरकार की रणनीति का उद्देश्य किसानों का ध्यान दिल्ली के मोर्चों से हटाकर दूरवर्ती पश्चिम हरियाणा में उलझाए रखना है।

केंद्र व कई राज्यों में सत्तारूढ़ बीजेपी को सबक सिखाने के लिए किसान नेताओं ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। इसी रणनीति के तहत किसानों ने ‘मिशन उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड’ की घोषणा की है। अन्नदाताओं की इस घोषणा से सरकार की नींद उड़ी हुई है। किसान आंदोलन (Kisan Andolan) से यूपी में बीजेपी के प्रतिकूल माहौल तैयार हुआ है। इस हालातों में प्रदेश से बीजेपी का सूपड़ा साफ हो जाने का अंदेशा है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। इसका नतीजा 2024 के लोकसभा चुनाव में भी निर्णायक साबित होगा। फिलहाल यूपी का मौजूदा सियासी माहौल बीजेपी के लिए भयावह है। योगी सरकार कुशासन, सांप्रदायिकता, दलितों, महिलाओं और आम लोगों पर बढ़ते हमलों, बेरोजगारी, छात्र-युवा असंतोष के कारण भारी एन्टी-इनकम्बेंसी का सामना कर रही है। इसकी अभिव्यक्ति हाल के पंचायत-चुनावों में साफ़ तौर से नजर आई। (Kisan Andolan)

रही सही कसर भी कोरोना की दूसरी लहर ने पूरी कर दी। महामारी से बुरी तरह प्रभावित शहरी मध्यवर्ग और ग्रामीण तबकों में योगी सरकार के खिलाफ जबरजस्त आक्रोश है। कोरोना के भयावह कुप्रबंधन ने मोदी-योगी दोनों की छवि को ध्वस्त कर दिया है। इन्हीं हालातों में बीजेपी में मोदी-योगी के बीच सत्ता-संघर्ष भी शुरू हो गया है। इस सत्ता-संघर्ष के पीछे यूपी विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव ही है। के मद्देनजर एक तरह का सत्ता-संघर्ष ही है। इन सब ने यूपी में बीजेपी की चुनावी संभावनाओं को पूरी तरह से धूमिल कर दिया है। (Kisan Andolan)

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