जानिए कब है अहोई अष्टमी, क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार, क्या है पूजा-विधि और शुभ मुहुर्त

अहोई अष्टमी पर्व रवि पुष्य योग से आरंभ होगा और पूरे दिन सौम्य व सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा, जो फलदायी है। अहोई अष्टमी व्रत नि:संतान महिलाएं भी संतान की कामना के लिए करती हैं। अहोई का अर्थ होता है अनहोनी को टालने वाली माता। यह व्रत निर्जला रखना चाहिए। फल और दूध आदि भी नहीं लेना चाहिए।

ऋषिकेश। अहोई अष्टमी इस बार पुष्प योग की वजह से फलदायी है। यह त्योहार संतान की लंबी आयु व सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। कार्तिक कृष्ण अष्टमी को यह व्रत रखा जाता है। रविवार को यह पर्व मनाया जाएगा।
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अहोई अष्टमी पर्व रवि पुष्य योग से आरंभ होगा और पूरे दिन सौम्य व सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा, जो फलदायी है। अहोई अष्टमी व्रत नि:संतान महिलाएं भी संतान की कामना के लिए करती हैं। अहोई का अर्थ होता है अनहोनी को टालने वाली माता। यह व्रत निर्जला रखना चाहिए। फल और दूध आदि भी नहीं लेना चाहिए।
शाम को तारा उदय होने पर माताएं अ‌र्घ्य देती हैं और संतान की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। चंद्रमा पति कारक व तारे पुत्र कारक होते हैं। रविवार को सूर्यास्त शाम 5:28 बजे होगा और उसके आधे घंटे बाद आकाश में तारे दिखने शुरू हो जाएंगे। रात 11:58 बजे चंद्रमा दिखाई देगा।

कब है व्रत रखने का शुभ मुहूर्त

अहोई अष्‍टमी का आरंभ कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी से होता है। इस बार अहोई अष्‍टमी 8 नवंबर से सुबह 7 बजकर 29 मिनट से हो रहा है। इस तिथि का समापन 9 नवंबर को सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर होगा।

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