लंतरानी : सामाजिक-आर्थिक स्थिति ठीक नहीं तो यूपी में …

अब तो यूपी में सचमुच रामराज्य है। न कोई गरीब है और न ही कोई दुखी और दरिद्र। हर तरफ खुशियाली ही खुशियाली है। मानव तो छोड़िये पशु-पक्षी और पेड़-रुख तक प्रफुल्लित एवं पल्लवितहो रहे हैं। चोर-बदमाश कब के यहां से भाग चुके हैं। जो नहीं भाग पाए वो जेल में भजन कर रहे हैं। सब योगी बाबा की माया है। लेकिन रामराज्य का सुख भोगने के लिए पात्रता जरुरी है। पात्रता सिर्फ आर्थिक -सामाजिक रूप से सुदृढ़ होना है। यदि आप आर्थिक-सामाजिक रूप से कमजोर हैं तो आपको क्षमा भी नहीं मिल सकती।

अगर भरोसा न हो तो आजीवन कारावास की सजा काट रहे उन तीन कैदियों से पूूछ लीजिये जिनकी क्षमा याचिका योगी सरकार की ओर से यह कहकर खारिज कर दी गई कि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। भला हो आला अदालत की जिसने योगी सरकार के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए व हास्यास्पद करार देते हुए तीनों कैदियों को अंतरिम जमानत दे दी।

अब किसी की आर्थिक-सामाजिक स्थिति न सुदृढ़ हो तो भला इसमें योगी सरकार और उनके रामराज्य का क्या दोष है ? यूपी वासियों को आर्थिक-सामाजिक रूप से सुदृढ़ सनाने के लिए योगी बाबा ने तो वह सब कर दिया जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया था। कोरोनाकाल में जब यूरोप और अमेरिका के लोग भुखमरी और बेरोजगारी से तबाह हो रहे थे, उस समय यूपी की योगी सरकार ने तीन करोड़ लोगों को रोजगार दे दिया। महानगरों से लौटे लाखों प्रवासी कामगारों को हुनरमंद बनाकर घर-गांव में ही काम दे दिया। मां-बहनों को घर में ही काम देकर हैट तरह से मजबूत बना दिया।

अब सूबे में सब सुखी हैं। हर्षित हैं। योगी बाबा के तेज से दुःख और शोक तो यूपी से ऐसे भागे जैसे सुबह सूरज निकलने पर अन्धेरा भागता है। अब जिसके राज्य से दुःख और शोक डरकर भाग जाएं उस राज्य को भला और क्या चाहिए? कुछ लोगों को तो सुख और समृद्धि भी नहीं सोहाती। त्रेता युग में भी एक धोबी को अयोध्या का वैभव नहीं सुहा रहा था। उसी तरह आज भी कुछ लोगों को सुख-समृद्धि नहीं सुहा रही है तो भला इसमें रामराज्य का क्या दोष ?

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