आइए जानते हैं अश्विन मास की शिवरात्रि की सही तिथि और मुहूर्त

स्कंद पुराण में उल्लेख है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति में रज और तम गुणों का संतुलन स्थापित होता है।

स्कंद पुराण में उल्लेख है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति में रज और तम गुणों का संतुलन स्थापित होता है। जो कि व्यक्ति को जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की प्राप्त करवाता है। मासिक शिवरात्रि का व्रत प्रत्येक हिंदी महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखने का विधान है। अश्विन मास की शिवरात्रि का व्रत 04 अक्टूबर को पड़ रहा है। जो कि एक विशिष्ट संयोग का निर्माण कर रहा है। तो आइए जानते हैं अश्विन मास की शिवरात्रि की सही तिथि, मुहूर्त और बन रहे विशिष्ट संयोग के बारे में…..

शिवरात्रि की तिथि और मुहूर्त-

अश्विन मास की शिवरात्रि का व्रत कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाएगा। हिंदी पंचांग के अनुसार चतुर्दशी की तिथि 04 अक्टूबर को रात में 09 बजकर 05 मिनट से प्रारंभ होकर 05 अक्टूबर को सांयकाल 07 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। हालांकि चतुर्दशी तिथि का सूर्योदय 05 अक्टूबर को होगा। लेकिन शिवरात्रि का पूजन रात्रि में होने के कारण अश्विन मास की मासिक शिवरात्रि 04 अक्टूबर,दिन सोमवार को ही मानी जाएगी। शिवरात्रि के पूजन के लिए शुभ मुहूर्त रात्रि 11.51 से लेकर 12.40 तक है।

शिवरात्रि का विशिष्ट संयोग-

पंचांग गणना के अनुसार अश्विन माह की मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव के पूजन के विशिष्ट संयोग का निर्माण हो रहा है। तिथि के अनुसार मासिक शिवरात्रि 04 अक्टूबर को सोमवार के दिन पड़ रही है। इसके साथ ही इस दिन सुबह त्रयोदशी तिथि होने के कारण प्रदोष का भी व्रत रखा जाएगा। प्रदोष का व्रत भी सोमवार को पड़ने के कारण सोम प्रदोष का संयोग बना रहा है। एक साथ ही भगवान शिव के प्रिय सोमवार प्रदोष और शिवरात्रि दोनों का ही एक साथ पड़ना विशिष्ट संयोग का निर्माण कर रहा है। इस दिन भगवान शिव का व्रत और पूजन विशेष फलदायी होगा।

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