रामविलास पासवान की विरासत अब दो टुकड़ों में बंटी, आयोग ने चुनाव चिह्न और नाम भी बदले

चुनाव आयोग ने लोकजनशक्ति पार्टी के दोनों धड़ों को अलग-अलग पार्टी के तौर पर मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब पुराना नाम और चुनाव चिह्न भी खत्म कर दिया है।

लोजपा में चल रहा विवाद अब सुलझ रहा है, आपको बता दें कि दलित राजनीति के बड़े चेहरे रहे रामविलास पासवान की विरासत उनके निधन के एक साल के बाद ही बंट गई है। चुनाव आयोग ने लोकजनशक्ति पार्टी के दोनों धड़ों को अलग-अलग पार्टी के तौर पर मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब पुराना नाम और चुनाव चिह्न भी खत्म कर दिया है।

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वहीँ अब चिराग पासवान की लीडरशिप वाले धड़े का नाम लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) होगा। इस दल को हेलिकॉप्टर चुनाव चिह्न आवंटित दिया गया है। इसके अलावा उनके चाचा और रामविलास पासवान के सगे भाई पशुपति कुमार पारस की पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी होगा। इस दल को सिलाई मशीन चुनाव चिह्न दिया गया है।

आपको बता दें कि चुनाव आयोग की ओर से जारी लेटर में बताया गया है कि चिराग पासवान की पार्टी का नाम अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) होगा। इसके अलावा उनकी पार्टी को चुनाव चिह्न के तौर पर हेलिकॉप्टर दिया गया है। वहीं उनके चाचा की पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी रख दिया गया है। उन्हें सिलाई मशीन चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। इसके साथ ही दोनों गुटों के बीच पार्टी को लेकर दावे की लड़ाई अब खत्म होती दिख रही है। हालांकि चिराग पासवान की पार्टी के नाम रामविलास जुड़ गया है, जिससे उन्हें चुनावी समर में पिता की विरासत के आधार पर वोट मांगने में मदद मिल सकती है।

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