ममता-BJP को रोकने के लिए कांग्रेस ने उठाया बड़ा कदम, करेगी इस पार्टी से गठबंधन

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बनने की तैयारी में जुटी वामपंथी और कांग्रेस पार्टियों ने एकजुट होकर मैदान में उतरने की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बनने की तैयारी में जुटी वामपंथी और कांग्रेस पार्टियों ने एकजुट होकर मैदान में उतरने की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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अधीर रंजन चौधरी के नेतृत्व में कमेटी बनाई

कांग्रेस की केंद्रीय इकाई ने एक दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष और सांसद अधीर रंजन चौधरी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई है जिसमें चार लोगों को शामिल किया गया है। अधीर चौधरी के अलावा वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अब्दुल मन्नान, राज्यसभा सांसद प्रदीप भट्टाचार्य और नेपाल महतो को इसकी जिम्मेवारी सौंपी गई है।

सीताराम येचुरी ने भी दिए निर्देश

इधर वाम मोर्चा की ओर से सीताराम येचुरी ने मोर्चा चेयरमैन विमान बोस व माकपा के महासचिव सूर्यकांत मिश्रा और अन्य नेताओं को निर्देश दे चुके हैं कि कांग्रेस नेताओं के साथ अगले दौर की वार्ता की जाए। सूत्रों के अनुसार इसी सप्ताह गठबंधन पर बात बन सकती है और आधिकारिक घोषणा भी हो सकती है।

सीट शेयरिंग और उम्मीदवार तय होने पर होगी बात

दोनों ही पार्टियों के सूत्रों ने बताया है कि राज्य में 2021 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीट शेयरिंग और उम्मीदवार तय करने पर विस्तृत बातचीत करनी है। खबर है कि दोनों ही पार्टियां मिलकर राज्य भर में अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही हैं। सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना है। सीताराम येचुरी ने कहा है कि गठबंधन का मुख्य मकसद भाजपा के वोट बैंक को काटना है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में माकपा और कांग्रेस को वोट देने वाले इन दोनों पार्टियों के कोर समर्थक हैं।

रंजन चौधरी और येचुरी बोले

आम लोगों का वोट इन दोनों पार्टियों के गठबंधन को बहुत कम मिलेगा। ऐसे में इस गठबंधन का बहुत अधिक नुकसान भाजपा को होने वाला नहीं है। हालांकि अगर अल्पसंख्यक वोट बैंक गठबंधन के पाले में जाता है तो इससे ममता को नुकसान होगा और भाजपा को अल्टीमेटली फायदा ही हो सकता है। इस बारे में पूछने पर जवाब को सीताराम येचुरी टाल गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधिर रंजन चौधरी से इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि माकपा कांग्रेस का गठबंधन राज्य में सत्ता का विकल्प बनेगा। इ

सके पहले 2016 में दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था माकपा ने 148 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिसमें से 26 सीटों पर जीत मिली थी जबकि कांग्रेस ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें 44 सीटों पर जीत मिली थी। सूत्रों के अनुसार 2021 में भी जहां जिस पार्टी के विधायक हैं वहां उसी पार्टी को टिकट देने के बारे में सहमति बनाने पर विचार किया जा रहा है।

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