म्यांमार में सैन्य तख्तापलट : आंग सान सू की अरेस्ट, सेना ने संभाली देश की कमान

एक दशक पूर्व तक तक़रीबन 50 साल सैनिक शासन देखने वाले म्यांमार में एकबार फिर सैन्य तख्तापलट हो गया है। देश की नेता आंग सांग सू की और राष्ट्रपति यू विन म्यिंट को गिरफ्तार कर देश को सेना ने अपने कब्जे में ले लिया है।

नेपीडा। एक दशक पूर्व तक तक़रीबन 50 साल सैनिक शासन देखने वाले म्यांमार में एकबार फिर सैन्य तख्तापलट हो गया है। देश की नेता आंग सांग सू की और राष्ट्रपति यू विन म्यिंट को गिरफ्तार कर देश को सेना ने अपने कब्जे में ले लिया है। देश में एक साल के लिए आपातकाल घोषित कर दिया गया है। पूर्व जनरल और उप राष्ट्रपति मिंट स्वे को कार्यकारी राष्ट्रपति बनाया गया है और उन्हें सैन्य प्रमुख का भी दर्जा दिया गया है।
Military coup in Myanmar

सड़कों पर सेना की तैनाती

इस अहम घटनाक्रम के बीच किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन को सख्ती से निबटने के लिए सड़कों पर सेना की तैनाती कर दी गयी है और तमाम तरह के संचार माध्यमों को बंद कर दिया गया है।
हालांकि इससे पहले सैन्य तख्ता पलट की आशंकाओं के बीच म्यांमार सेना की तरफ से सफाई दी गयी कि तख्ता पलट का कोई इरादा नहीं है। सेना कानून के मुताबिक ही संविधान की रक्षा करेगी। गौरतलब है कि म्यांमार में 1962 में सैन्य तख्तापलट हुआ था जो लगभग पांच दशकों तक कायम रहा।
देश में सैन्य तख्तापलट से पूर्व आंग सान सू की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के प्रवक्ता मायो नयुंट ने आंग सान सू को हिरासत में लिये जाने के बाद आशंका जतायी थी कि जो हालात बने हैं, उससे साफ है कि सेना तख्तापलट करने का जा रही है।
देश के ताजा घटनाक्रम के संकेत पिछले कुछ दिनों पहले तब मिलने लगे थे जब सेना के प्रवक्ता द्वारा सैन्य तख्ता पलट की संभावना को खारिज नहीं किया था। दरअसल, नवंबर में हुए संसदीय चुनाव में सत्ताधारी एनएलडी पर चुनावी धांधली के आरोप लगे थे। इसमें एनएलडी की भारी जीत हुई। इस चुनाव में एनएलडी का मुख्य मुकाबला यूनियन सॉलिडरिटी एंड डवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) से हुआ। बताया जाता है कि इस संगठन को सेना का संरक्षण प्राप्त है। चुनाव नतीजों के बाद यही संगठन चुनाव में एनएलडी पर धांधली का आरोप लगाते हुए मामला अदालत में ले गया।

सेनाध्यक्ष मिन आंग हलायंग ने कही थी ये बात

इसी संदर्भ में जब सैन्य प्रवक्ता से सवाल किए गए तो उसने सैनिक तख्ता पलट की संभावना से इनकार नहीं किया। सेनाध्यक्ष मिन आंग हलायंग ने भी बुधवार को कहा था कि कुछ खास परिस्थितियों में देश के संविधान को रद्द किया जा सकता है।

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