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Up kiran,Digital Desk : कहते हैं कि सच्चा पड़ोसी वही होता है जो मुसीबत के वक्त सबसे पहले खड़ा हो। हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका पर इस समय कुदरत का भयानक कहर टूटा है। 'चक्रवात दित्वाह' (Cyclone Ditwah) ने वहां ऐसी तबाही मचाई है कि लाखों लोग बेघर हो गए हैं। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने एक बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है।

आधी रात को पहुंची 'भारतीय मदद'

जब पूरा कोलंबो गहरे संकट और बारिश से जूझ रहा था, ठीक उसी वक्त शनिवार तड़के करीब 1:30 बजे भारतीय वायुसेना का C-130 विमान कोलंबो के एयरपोर्ट पर उतरा। यह कोई आम लैंडिंग नहीं थी। इस विमान में बाढ़ में फंसे लोगों के लिए खाना, पीने का साफ पानी और साफ-सफाई (हाइजीन) का जरूरी सामान था। भारत ने इस मदद को नाम दिया है- 'ऑपरेशन सागर बंधु'। नाम से ही साफ है कि समंदर के रास्ते हम भाईचारा निभा रहे हैं। इससे पहले भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि के जरिए भी राहत सामग्री की पहली खेप पहुंचाई जा चुकी है।

श्रीलंका में हालात दिल दहलाने वाले

वहां की जमीन से जो खबरें आ रही हैं, वे काफी चिंताजनक हैं। चक्रवात दित्वाह की वजह से आई बाढ़ और भूस्खलन (Landslides) ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि अब तक 69 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन डर है कि यह संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है। खासकर कैंडी और बांदरवेला (बडुला) जैसे पहाड़ी इलाकों में हालात बहुत बुरे हैं, जहां पहाड़ खिसकने से कई लोग लापता हैं।

लाखों लोग प्रभावित, बत्ती गुल

इस आपदा का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि श्रीलंका के कई पश्चिमी इलाकों में नदियों (केलानी और अट्टनागालु) का पानी खतरनाक स्तर पर है। करीब 2 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। लगभग 35% देश में बिजली ठप पड़ गई है, जिससे 70 लाख लोगों के घरों में अंधेरा छा गया है।

राहत कर्मी जान पर खेलकर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के पानी ने रास्तों को रोक दिया है। मौसम विभाग ने अभी और 200 मिमी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे भयानक माहौल में, भारत द्वारा भेजी गई मदद वहां के पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत बनकर पहुंची है। भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की नीति पर वह पूरी शिद्दत से कायम है।