Encephalitis से अब नहीं होगी एक भी बच्चे की मौत, वैज्ञानिकों ने खोजी इसकी काट

पूर्वांचल के नौनिहालों को हर वर्ष लीलने वाले इंसेफेलाइटिस को अब हारना ही होगा। वैज्ञानिकों ने इसका काट खोज लिया है। नए रिसर्च के मुताबिक नौनिहालों को पुष्य नक्षत्र में दवा की डोज देने पर वे इंसेफेलाइटिस से दूर रहेंगे।

गोरखपुर। पूर्वांचल के नौनिहालों को हर वर्ष लीलने वाले इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) को अब हारना ही होगा। वैज्ञानिकों ने इसका काट खोज लिया है। नए रिसर्च के मुताबिक नौनिहालों को पुष्य नक्षत्र में दवा की डोज देने पर वे इंसेफेलाइटिस से दूर रहेंगे। यह बात ‘किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी’ के चिकित्सकों और ‘आरोग्य भारती’ के संयुक्त रिसर्च में सामने आई है।
Children do not get JE from 'Swarnaprashan' in 'Pu
रिसर्च की शुरुआत से ही गोरखपुर के कई गांवों में बच्चों को ‘पुष्य नक्षत्र’ में ‘स्वर्णप्राशन’ की दवा दी जा रही है। चिकित्सकों का दावा है कि ऐसा करने से पिछले आठ महीने में गांवों में किसी बच्चे को इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) नहीं हुआ है, जबकि पहले यह आम बात थी। इस कामयाबी के बाद शासन ने केंद्र से इंसेफेलाइटिस प्रभावित क्षेत्रों में पुष्य नक्षत्र में इस दवा का सेवन कराने की सिफारिश की गई है।

जनवरी 2018 से चल रहा रिसर्च (Encephalitis)

बता दें कि ‘किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी’ के चिकित्सकों और ‘आरोग्य भारती’ ने जनवरी 2018 से संयुक्त रूप से इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) प्रभावित गांवों में रिसर्च शुरू किया। सहजनवा के भड़सार, तेलियाडीह, गोपलापुर, चिरईयागांव और परसाडाढ़ में बच्चों को ‘स्वर्णप्राशन’ नामक दवा पिलाने का काम शुरू किया गया था।

भारतीय पद्धति के मुताबिक दी गई दवा

चिकित्सकों ने इस दवा का सेवन भारतीय पद्धति के अनुसार ‘पुष्य नक्षत्र’ में करना शुरू किया। इसके सकारात्मक परिणाम आने लगे। ‘पुष्य नक्षत्र’ में इस दवा को पीने वाले बच्चों की ‘रोग प्रतिरोधक क्षमता’ में आश्चर्यजनक बृद्धि हुई। रिसर्च के मुताबिक पिछले आठ महीनों में 10 हजार की आबादी वाले इन गांवों में कोई बच्चा इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) से बीमार नहीं हुआ है।

वर्ष 2017 में भड़सार में बीमार हुए थे बच्चे (Encephalitis)

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 में भड़सार में इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) से पांच बच्चे बीमार हुए थे। एक की मौत हो गई थी जबकि बीते एक दशक में हर साल चार से छह मासूम बच्चे इंसेफेलाइटिस के शिकार हुए थे।

कैम्प लगाती है केजीएमयू की टीम

स्वर्णप्राशन के सेवन कराने के साथ ही केजीएमयू की टीम गांव में हर महीने कैंप भी लगाती है। बच्चों के साथ ग्रामीणों की सेहत की जांची जाती है। इसका परिणाम भी सकारात्मक बताया जा रहा है। दवा के सेवन से बीमार बच्चों की सेहत भी सुधर गई। आरोग्य भारती की रिपोर्ट के बाद आयुष विभाग के तत्कालीन सचिव मुकेश मेश्राम ने केंद्र से प्रभावित गांवों में यह अभियान चलाने की सिफारिश की है। (Encephalitis)

क्या है ‘स्वर्णप्राशन’ (Encephalitis)

यह दवा शुद्ध स्वर्ण, गाय का घी, शहद, अश्वगंधा, ब्राह्मी, वचा, गिलोय, शंखपुष्पी जैसी औषधियों से बनती है। इस दवा की चंद बूदें बच्चों को पिलाई जाती हैं। छह महीने से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों को यह दवा ‘पुष्य नक्षत्र’ में दी जाती है। (Encephalitis)

बोले प्रभारी

केजीएमयू के आउटरीच प्रोग्राम प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी का कहना है कि ‘स्वर्णप्राशन’ से भड़सार गांव में एक भी इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) का केस सामने नहीं आया। इस केस स्टडी को केंद्र सरकार के साथ राज्य आयुष विभाग को भेजा गया है।
मुश्किल समय में हर व्यक्ति इन 4 चीजों को हमेशा रखें याद, टल जाता है बड़े से बड़ा संकट

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *