OMG : इस गांव में मिला पत्थर दूध को दही में बदल देता है, जानिए कहां होता है ये कारनामा

नई दिल्ली: हमारे देश में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें और जगहें हैं जहां हर साल लाखों की संख्या में सैलानी दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं। आपको बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक राजस्थान आते हैं। क्योंकि राजस्थान में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें और जगहें हैं, जिन्हें देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां एक अनोखा पत्थर पाया जाता है और इसी पत्थर के दूध से दही बनाया जाता है। दरअसल, जैसलमेर भी एक ऐसा पर्यटन स्थल है जिसे स्वर्णनगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां के पीले पत्थर ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है।

ऐसा पत्थर जैसलमेर से करीब 50 किमी दूर स्थित हाबुरगांव में पाया जाता है। जो बहुत बढ़िया है। इस पत्थर के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह पत्थर दूध को जम कर दही में बदल देता है। आमतौर पर हम दूध से दही बनाने के लिए छाछ का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन राजस्थान के इस गांव की कहानी थोड़ी अलग है. दूध से दही बनाने के लिए यहां के लोग सैकड़ों सालों से इस चमत्कारी पत्थर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि इस गांव का नाम हाबुर है, लेकिन वर्तमान में इसे पूनमनगर के नाम से जाना जाता है। इस गांव के पत्थर के अंदर कई खूबियां हैं। इस पत्थर को स्थानीय भाषा में ‘हबुरिया भाटा’ भी कहा जाता है। यह वह चमत्कारी पत्थर है जिससे इस गांव के लोग दही जमा करते हैं। इस पत्थर के संपर्क में आते ही दूध जम जाता है। यह पत्थर अपनी विशेष गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में बहुत लोकप्रिय है। यहां आने वाले सैलानी अपने साथ हाबर पत्थर से बने बर्तन भी ले जाते हैं। इस पत्थर से बने बर्तनों की मांग यहां हमेशा बनी रहती है।

कुछ शोधों में यह पाया गया कि इस पत्थर में दही जमाने के लिए वे सभी रसायन मौजूद हैं। जो दूध को दही में बदल देता है। इस पत्थर में अमीनो एसिड, फेनिलएलनिन, रिफाफेन टायरोसिन मौजूद होते हैं। आपको बता दें कि ये रसायन दूध से दही जमाने में मददगार होते हैं। इतना ही नहीं इस पत्थर से जमने वाला दही मीठा और सुगंधित होता है।

पत्थर से बने इस बर्तन में रखे दही और इससे बनी लस्सी के दीवाने देश-विदेश के पर्यटक हैं. हाबुर गांव के भूमिगत से निकलने वाला यह पत्थर कई खनिजों और अन्य जीवाश्मों से भरा हुआ है जो इसे चमत्कारी बनाते हैं। कहा जाता है कि राजस्थान का यह रेगिस्तानी जिला जैसलमेर कभी अथाह समुद्र हुआ करता था और इसके सूखने के बाद यहां कई समुद्री जीव जीवाश्म बन गए।

उसके बाद वे पहाड़ों में बदल गए। इस गांव में पाए जाने वाले इस पत्थर से बर्तन, मूर्ति और खिलौने बनाए जाते हैं। यह हल्का सुनहरा और चमकदार होता है। इससे बनी मूर्तियां लोगों को खूब आकर्षित करती हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह पत्थर ताजमहल समेत कई जगहों पर स्थापित है।