श्रद्धा-विश्वास के साथ केवल करें ये 7 उपाय, मां दुर्गा होंगी प्रसन्न, मनकोमना होगी पूरी

अगर आपकी कोई मनोकामना पूरी नहीं हो रही हो तो शारदीय नवरात्र में किसी दिन पूर्ण श्रद्धा-विश्वास के साथ केवल ये 7 उपाय कर लें, प्रसन्न होकर माँ अपने भक्तों की एक साथ सैकड़ों मनकोमना पूरी कर देती है।  उपायों को शाम को 6 बजे से लेकर रात 8 बजे के बीच ही करना है।

नयी दिल्ली। सभी नवरात्रियों में कामना पूर्ति के लिए आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक शुभ मानी जाती है। इस नवरात्र कई जानकार साधक में कष्टों के निवारण, धन प्राप्ति या अन्य मनोकामना को पूरा करने के लिए अनेक उपाय भी करते हैं।
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 अगर आपकी कोई मनोकामना पूरी नहीं हो रही हो तो शारदीय नवरात्र में किसी दिन पूर्ण श्रद्धा-विश्वास के साथ केवल ये 7 उपाय कर लें, प्रसन्न होकर माँ अपने भक्तों की एक साथ सैकड़ों मनकोमना पूरी कर देती है।  उपायों को शाम को 6 बजे से लेकर रात 8 बजे के बीच ही करना है।
शारदीय नवरात्रि में जिस भी आप उपाय कर रहे हो। उस दिन सुबह ही उपवास करने का संकल्प लें। पूरे दिन अस्वाद व्रत रखकर माँ दुर्गा की पूजा और अपनी इच्छा पूर्ति की प्रार्थना करते रहे, एवं शाम को 6 बजे से कुछ समय पहले दोबारा स्नान कर लें। इन उपाय को स्नान करने के बाद 6 बजे से रात 8 बजे के बीच ही करना है।

यह है मनोकामना पूर्ति के 7 उपाय

1- माता दुर्गाजी को शहद को भोग लगाने से भक्तों को सुंदर रूप प्राप्त होता है व्यक्तित्व में तेज प्रकट होता है। 2- माँ दुर्गा की के बीज मंत्र ऊँ दुं दुर्गाय नमः का जप 108 बार “लाल रंग के कम्बल” के आसन पर बैठकर करे। इससे सभी मनोकामना पूरी होने लगती है।
3- स्थाई धन लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए 11 पान में गुलाब की 7 पंखुरियां रखकर माँ दुर्गा को अर्पित करें।
4- इस मंत्र का जप करने से जपकर्ता के पूरे परिवार का सदैव मंगल ही मंगल होता है- ऊँ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।
5- शारदीय नवरात्रि के सोमवार और शनिवार के दिन शिवलिंग पर काले तिल और गंगाजल चढ़ाएं ऐसा करने से अनेक बीमारियों से मुक्ति मिल जाती है।
6- शारदीय नवरात्रि संध्याकाल में श्रीरामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से सभी कार्य सफल होने लगते हैं एवं कार्यों के मार्ग में आने वाली समस्त विघ्न बाधाएं भी दूर हो जाती है।
7- शारदीय नवरात्रि में इस मंत्र का जप करने से माँ दुर्गा शत्रुओं से रक्षा करती है- ऊँ जयन्ती मङ्गलाकाली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।

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