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कुमार विश्वास के गांव का फार्म हाउस है असली लग्जरी, इसके आगे 5 मंजिला बिल्डिंग में स्पा-सलून भी फेल

कुमार विश्वास ने अपने गांव में एक खूबसूरत फार्म हाउस बना रखा है जो कि किसी भी इंसान का सपना हो सकता है। गर्मी में यह जगह काफी सुकून देती है। अगर अब तक ना देखा हो तो देख लें।

Kajal SharmaMay 11, 2026 01:20 pm IST
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आपने देखा कुमार विश्वास का खूबसूरत फार्म हाउस

कुमार विश्वास जाने-माने कवि और पॉलीटीशियन हैं। उन्होंने नितेश कुमार की मच अवेटेड फिल्म रामायण में गाने भी लिखे हैं। कुमार विश्वास लग्जरी और सादगी के बीच अच्छा बैलेंस बनाकर चलते हैं। उनके घर में स्पा और सलून जैसी सारी सुविधाए हैं। वहीं उनके गांव पिलखुआ के पास कुमार विश्वास का सुंदर सा फार्म हाउस है। इसकी क्या खासियत है और खूबसूरत तस्वीरें यहां देखें।

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केवी कुटीर है असली लग्जरी

कुमार विश्वास के लग्जरी घर के अलावा गांव में एक ऐसा फार्म हाउस है जिसका जिक्र कई बार खबरों में हो चुका है। इसका नाम केवी कुटीर है। कुमार विश्वास अपने परिवार के साथ यहां क्वॉलिटी टाइम बिताते हैं। बता दें कि कुमार विश्वास का नोएडा में पाच मंजिला शानदार घर है। इसमें स्पा, सलून सब कुछ है लेकिन असली लग्जरी उनका गांव का ये फार्म हाउस है।

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हरा-भरा फार्म हाउस

उनके फार्म हाउस पर कई तरह की फसलें हैं। फल हैं, सब्जियां हैं, मिर्च हैं जिनका वह अचार बनवाते हैं।

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इको फ्रेंडली हट

कुमार विश्वास ने यहां हट स्टाइल में कमरे बनवा रखे हैं। इंट्रेस्टिंग बात है कि ये सीमेंट से नहीं बने।

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ऐसे बना है वैदिक प्लास्टर

डॉक्टर विश्वास के फार्म हाउस में जो हट हैं वो पीली मिट्टी, गोबर, दालों और कुछ पेड़ों और धरती के कुछ मिनरल्स से बना है। इसे वह वैदिक प्लास्टर कहते हैं।

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घर में क्रिएटिविटी की झलक

वैदिक प्लास्टर इको फ्रेंडली होता है। पुराने जमाने में घर इसी तरह से बनाए जाते थे। कुमार विश्वास के इस घर में उनकी क्रिएटिविटी और आस्था की भी झलक मिलती है।

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मौसम के हिसाब से तापमान बदलता है घर

कुमार विश्वास की वैदिक कुटीर गर्मी में ठंडी रहती है और सर्दियों में गर्माहट देती है। इनमें थर्मल इंसुलेशन नैचुरल होता है।

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सरस्वती की सुंदर प्रतिमा

कुमार विश्वास के फार्म हाउस पर तालाब बत्तख, गायें, कुत्ते, फल-फूल सब कुछ है। उन्होंने वहां पर सरसस्वती मां की बड़ी सी प्रतिमा भी लगा रखी है।

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Somnath Amrit Mahotsav: सोमनाथ मंदिर में पीएम मोदी ने किया कुंभाभिषेक, क्यों किया जाता है यह अनुष्ठान, क्या है इसका लाभ

सोमनाथ मंदिर के इतिहास में एक यादगार पल दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा सोमनाथ मंदिर के 155 फीट ऊंचे शिखर कलश का भव्य कुंभाभिषेक किया गया। 11 पवित्र तीर्थों से लाए गए 1100 लीटर पवित्र जल से अभिषेक संपन्न हुआ। यह अनुष्ठान सोमनाथ मंदिर की दिव्य ऊर्जा को फिर से जागृत किया।

Navaneet RathaurMay 11, 2026 04:08 pm IST
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कुंभाभिषेक क्या है?

कुंभाभिषेक मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को नवीनीकृत करने का प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है। संस्कृत में 'कुंभ' का अर्थ कलश और 'अभिषेक' का अर्थ दिव्य स्नान है। इसमें विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देव विग्रहों पर चढ़ाया जाता है। यह कोई साधारण पूजा नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलने वाला विशाल वैदिक यज्ञ, हवन और मंत्रोच्चार का अनुष्ठान है।

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क्यों किया जाता है कुंभाभिषेक?

शास्त्रों के अनुसार, समय के साथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा कम होने लगती है। कुंभाभिषेक के माध्यम से उस ऊर्जा को फिर से सक्रिय और मजबूत किया जाता है। आगम शास्त्र कहते हैं कि मंदिर केवल पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का केंद्र होता है। नियमित पूजा-अर्चना के बावजूद ऊर्जा धीरे-धीरे क्षीण होती है, इसलिए समय-समय पर कुंभाभिषेक आवश्यक माना जाता है।

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सोमनाथ में हुआ यह अनुष्ठान कितना खास?

सोमनाथ मंदिर में यह कुंभाभिषेक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में 350 टन की विशेष क्रेन की मदद से 1.86 टन के कलश को 155 फीट की ऊंचाई पर चढ़ाया। देशभर के पवित्र तीर्थों से लाए गए जल से अभिषेक करने के बाद नूतन ध्वजारोहण भी किया गया। यह आयोजन मंदिर की पवित्रता को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ।

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कुंभाभिषेक से मिलने वाले लाभ

कुंभाभिषेक के दौरान मंदिर में उपस्थित रहने और अभिषेक देखने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इससे मंदिर की दिव्य शक्ति बढ़ती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भक्तों को गहरी मानसिक शांति मिलती है। पूरे क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण फैलता है। सोमनाथ जैसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग में यह अनुष्ठान लाखों श्रद्धालुओं को नई आस्था और ऊर्जा प्रदान करता है।

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं का विवाह चंद्रदेव से हुआ था, लेकिन चंद्रमा का प्रेम केवल रोहिणी पर था। इससे क्रोधित होकर दक्ष ने चंद्रमा को क्षय रोग का शाप दे दिया। चंद्रमा की पीड़ा से पृथ्वी पर अंधकार छा गया।

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चंद्रमा की घोर तपस्या

राजा दक्ष के शाप से पीड़ित चंद्रमा ने ब्रह्माजी की सलाह पर प्रभास क्षेत्र ( आज के सोमनाथ) में भगवान शिव की घोर तपस्या की। प्रसन्न होकर शिवजी ने चंद्रमा को वरदान दिया और स्वयं ज्योतिर्लिंग रूप में वहां स्थापित होने का आशीर्वाद दिया। चंद्रमा ने शिव को अपना नाथ माना, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को सोमनाथ कहा जाता है।

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सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

सोमनाथ मंदिर कई बार आक्रमणों का शिकार हुआ, लेकिन हर बार यह पुनर्निर्मित होकर और मजबूत हुआ। प्राचीन काल में यहां का मूल शिवलिंग हवा में लटका हुआ माना जाता था। आज यह मंदिर आस्था, साहस और भारतीय संस्कृति की जीवंत गाथा है। यहां हिरण्या, कपिला और सरस्वती नदियों का त्रिवेणी संगम है, जहां स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है।

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कुंभाभिषेक - आस्था का महान संगम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया यह कुंभाभिषेक केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर अब नई ऊर्जा से भर गया है। लाखों भक्तों के लिए यह पावन स्थल और भी अधिक दिव्य हो गया है।

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