पंजाब में 'जातीय चक्रव्यूह' की नई जंग: 2027 चुनाव से पहले AAP, BJP, कांग्रेस और अकाली दल ने चली बड़ी चाल
पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election 2027) को लेकर राज्य की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पंजाब की सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच जाति आधारित राजनीति का खेल बेहद तेज हो गया है। सभी दल अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने के साथ-साथ राज्य के सबसे प्रभावशाली समुदायों– जाट सिख, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), और अनुसूचित जातियों (SC) के बीच एक नया और मजबूत जातीय समीकरण बनाने की होड़ में लग गए हैं। इसके अलावा शहरी व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को लुभाने के लिए भी खास रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। एवीपी न्यूज की विशेष पॉलिटिकल डेस्क प्रभारी महिमा पांडेय की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड चुनावी विश्लेषण रिपोर्ट में समझिए कि आखिर पंजाब के माझा, मालवा और दोआबा क्षेत्र में सत्ता की नई जंग किस करवट बैठ रही है।
बीजेपी ने बदला अपना पुराना पैंतरा, 'शहरी हिंदू पार्टी' की छवि छोड़ सिख जाटों पर लगाया बड़ा दांव
पंजाब की कुल जनसांख्यिकी की बात करें तो यहां सिखों की आबादी लगभग 57 प्रतिशत है, जबकि हिंदू मतदाता करीब 38 प्रतिशत हैं। दशकों से पंजाब में बीजेपी को मुख्य रूप से केवल शहरी हिंदू वोटरों के समर्थन वाली पार्टी के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन इस बार बीजेपी ने अपनी इस पुरानी छवि को पूरी तरह बदलने का मास्टरस्ट्रोक खेला है। पार्टी ने मालवा के दिग्गज सिख जाट नेता केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया राज्याध्यक्ष नियुक्त किया है। बीजेपी का यह कदम सीधे तौर पर राज्य के सबसे प्रभावशाली जाट सिख समुदाय के भीतर अपनी गहरी पैठ बनाने की रणनीति का हिस्सा है। इसके साथ ही पार्टी ओबीसी और सैनी बिरादरी को साधने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर संवाद कार्यक्रम और रैलियां आयोजित कर रही है।
मालवा की 69 सीटों पर टिका है पंजाब का ताज, कैप्टन, बिट्टू और सांपला के भरोसे बीजेपी की नैया
रणनीतिक तौर पर पंजाब तीन प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में बंटा हुआ है– मालवा, माझा और दोआबा। राज्य की कुल 117 विधानसभा सीटों में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र से आती हैं, जबकि माझा में 25 और दोआबा में 23 सीटें हैं। यही वजह है कि बीजेपी का पूरा फोकस फिलहाल मालवा पर है। मालवा क्षेत्र के रहने वाले नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे कद्दावर जाट सिख चेहरों के दम पर बीजेपी जाट किसानों के बीच पैठ बना रही है। वहीं दूसरी तरफ, राज्य के करीब 32 प्रतिशत दलित (SC) वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला, सोम प्रकाश और अविनाश चंदर जैसे बड़े दलित चेहरों को मोर्चे पर लगा दिया है।
अकाली दल का 'घर वापसी' प्लान, पारंपरिक जाट-सिख वोटबैंक के साथ शहरी व्यापारियों को जोड़ने की मुहिम
पंजाब की सत्ता पर लंबे समय तक राज करने वाले शिरोमणि अकाली दल (SAD) का मुख्य आधार हमेशा से जाट सिख और पंथक सिख वोटर रहे हैं। हालांकि, साल 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की आंधी ने अकाली दल के इस अभेद्य किले में भारी सेंध लगा दी थी। अब सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में अकाली दल अपने इस पारंपरिक वोट बैंक की 'घर वापसी' कराने में जुटा है। अपनी पुरानी कोर पॉलिटिक्स से आगे बढ़कर शिरोमणि अकाली दल ने इस बार नया प्रयोग किया है। पार्टी ने 70 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में अपने एससी-बीसी, महिला और यूथ विंग को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। इसके साथ ही, हिंदुओं और शहरी वोटरों को लुभाने के लिए राज्य के 67 विधानसभा क्षेत्रों में विशेष 'व्यापार विंग' के हलका प्रधानों (हल्का प्रभारियों) की नियुक्ति की है ताकि गैर-पारंपरिक शहरी वोट बैंक को मजबूत किया जा सके।
कांग्रेस की जिला स्तर पर बड़ी नाकेबंदी, रूठे हुए दलितों और किसानों को मनाने के लिए फ्रंटल विंग्स एक्टिव
साल 2022 में सत्ता गंवाने के बाद पंजाब कांग्रेस इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक हमेशा से जाट सिख, दलित और हिंदुओं का एक मिला-जुला कॉम्बिनेशन रहा है। अपने इसी पुराने गढ़ को दोबारा हासिल करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने जिला स्तर पर संगठन की नई नाकेबंदी शुरू की है। कांग्रेस अब जिला स्तरीय नियुक्तियों में सभी सामाजिक वर्गों (जाट, दलित, हिंदू और ओबीसी) को आनुपातिक प्रतिनिधित्व दे रही है ताकि जिन इलाकों में जनाधार कमजोर हुआ था, वहां फिर से जान फूंकी जा सके। इसके लिए कांग्रेस के एससी विभाग, ओबीसी विभाग, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस और व्यापार प्रकोष्ठ को चौबीसों घंटे ग्राउंड वर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) को काटने के लिए सीएम भगवंत मान का 'कल्याण बोर्ड' फॉर्मूला
पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सत्ता को बरकरार रखने और चार साल की सरकार के बाद पैदा होने वाली स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को तोड़ने की है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की बंपर जीत के पीछे ग्रामीण मालवा क्षेत्र के जाट सिख किसानों और बड़े दलित वर्ग का एकतरफा समर्थन था। इस समर्थन को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक अनूठा प्रशासनिक और राजनीतिक कार्ड खेला है। पंजाब सरकार ने जिला और विधानसभा स्तर पर सीधे तौर पर अलग-अलग समुदायों तक पहुंच बनाने के लिए 21 राज्य स्तरीय 'कल्याण बोर्डों' का गठन किया है। इन बोर्डों के माध्यम से सरकार सीधे विभिन्न जातियों और समाजों के प्रमुख लोगों से संवाद करेगी, सरकारी योजनाओं का फीडबैक लेगी और चुनाव से पहले उनकी सभी शिकायतों को दूर कर विपक्ष के जातीय समीकरणों को फेल करेगी।