राजस्थान में आर-पार! हनुमान बेनीवाल ने BJP प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को भेजा कानूनी नोटिस, 7 दिन का अल्टीमेटम देकर दी ये बड़ी चेतावनी
राजस्थान के सियासी समर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जारी जुबानी जंग अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। नागौर से सांसद और आरएलपी के फायरब्रांड राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें एक सख्त कानूनी नोटिस थमा दिया है। बेनीवाल ने यह कदम मदन राठौड़ द्वारा उनके खिलाफ कथित तौर पर 'सामाजिक बहिष्कार' की अपील किए जाने के विरोध में उठाया है। इस लीगल नोटिस के बाद मरुधरा की राजनीति का पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है और यह पूरा विवाद अब सियासी मंच से निकलकर कानूनी लड़ाई की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है।
30 मई को दिए गए बयान पर घमासान, बेनीवाल ने लगाया छवि खराब करने का बड़ा आरोप
आरएलपी मुख्यालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हनुमान बेनीवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से यह कानूनी नोटिस मदन राठौड़ को भिजवाया है। नोटिस में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि 30 मई को एक सार्वजनिक सभा के दौरान और उसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर हनुमान बेनीवाल के सामाजिक बहिष्कार की बात कही थी। आरएलपी का कहना है कि मदन राठौड़ का यह बयान एक क्षेत्र से चुने हुए मौजूदा सांसद की सामाजिक और राजनीतिक छवि को जानबूझकर जनता की नजरों में धूमिल करने की गहरी साजिश का हिस्सा है।
मानहानि और सुरक्षा में कटौती का भी जिक्र, समाज में नफरत फैलने की जताई आशंका
हनुमान बेनीवाल के वकील द्वारा तैयार किए गए इस नोटिस में साफ कहा गया है कि राठौड़ की टिप्पणी पूरी तरह से मानहानिकारक है और इसका एकमात्र उद्देश्य बेनीवाल को समाज से अलग-थलग करना है। नोटिस के मुताबिक, एक जनप्रतिनिधि के सामाजिक बहिष्कार की ऐसी खुली अपील समाज में उनके खिलाफ शत्रुता, डर और दबाव का एक बेहद प्रतिकूल माहौल पैदा कर सकती है, जो संवैधानिक भावनाओं के बिल्कुल विपरीत है। इसके साथ ही नोटिस में हाल ही में बेनीवाल की सुरक्षा व्यवस्था में की गई अचानक कटौती का भी विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है। बेनीवाल के खेमे का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर की गई एक टिप्पणी के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा उनके तीन पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) को हटा दिया गया था, जिससे उनकी सुरक्षा पहले ही खतरे में है और अब इस तरह के बयान उनके लिए हालात और ज्यादा गंभीर बना सकते हैं।
बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने की मांग, 7 दिन के भीतर एक्शन न लेने पर कोर्ट जाने की चेतावनी
31 मई को जारी किए गए इस लीगल नोटिस में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के सामने कुछ बेहद सख्त शर्तें रखी गई हैं। हनुमान बेनीवाल ने मांग की है कि मदन राठौड़ भविष्य में उनके खिलाफ इस तरह की अमर्यादित बयानबाजी करने से पूरी तरह तौबा करें। साथ ही, इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके इस विवादित बयान से जुड़ी जो भी वीडियो या सामग्री उपलब्ध है, उसे तुरंत प्रभाव से हटाया जाए और मदन राठौड़ इसके लिए बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी करें। नोटिस में मदन राठौड़ को साफ तौर पर 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर इन मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो हनुमान बेनीवाल उनके खिलाफ दीवानी (सिविल), आपराधिक (क्रिमिनल) और संवैधानिक कार्रवाई शुरू करते हुए कोर्ट में मानहानि और भारी हर्जाने का मुकदमा दायर करेंगे।
मुख्यमंत्री को 'मूर्खाधिराज' कहने से शुरू हुआ था पूरा फसाद, अब कानूनी दांवपेंच में उलझी सियासत
गौरतलब है कि इस पूरे हाई-प्रोफाइल सियासी विवाद की जड़ें पिछले सप्ताह जयपुर के पास आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हुई हैं। उस प्रदर्शन के दौरान हनुमान बेनीवाल ने मंच से राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "मूर्खाधिराज" कहकर संबोधित कर दिया था। बेनीवाल के इस तीखे और विवादित बयान के बाद पूरी भाजपा आगबबूला हो गई थी और मदन राठौड़ समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने इसकी कड़ी निंदा की थी। इसी गुस्से के बीच मदन राठौड़ ने कथित रूप से बेनीवाल जैसे नेताओं के सामाजिक बहिष्कार की बात कह दी थी, जो अब खुद उनके लिए एक बड़ा कानूनी सिरदर्द बन चुकी है। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष इस 7 दिनों के अल्टीमेटम का क्या जवाब देते हैं।