सड़क पर उतरे 'न्याय के पहरेदार': राजस्थान में जज खुद कर रहे बसों की जांच, हादसों पर लगाम लगाने के लिए 12 जिलों में चलाया अभियान

सड़क पर उतरे 'न्याय के पहरेदार': राजस्थान में जज खुद कर रहे बसों की जांच, हादसों पर लगाम लगाने के लिए 12 जिलों में चलाया अभियान

 

राजस्थान की सड़कों पर इन दिनों एक हैरान करने वाला लेकिन सराहनीय नजारा देखने को मिल रहा है। राज्य में लगातार बढ़ रहे भीषण सड़क हादसों और बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को देखते हुए, अब राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) ने कड़ा रुख अपना लिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब न्यायिक अधिकारी (जज) खुद सड़कों पर उतरकर बसों की औचक जांच कर रहे हैं। दौसा में हाल ही में हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे हादसे के बाद, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच यह 'जमीनी कार्रवाई' यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़े रक्षा कवच के रूप में देखी जा रही है।

12 जिलों में छिड़ा 'सेफ्टी वॉर', बस स्टैंड से लेकर टोल तक पड़ताल

यह विशेष अभियान राजस्थान के 12 प्रमुख जिलों में एक साथ चलाया जा रहा है, जिनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, सीकर, अलवर, भीलवाड़ा, राजसमंद और श्रीगंगानगर शामिल हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव, जो खुद न्यायिक सेवा के उच्च अधिकारी होते हैं, अब ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग (RTO) की टीमों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बस स्टैंड, टोल प्लाजा और मुख्य चौराहों पर तैनात हैं। जजों का यह दस्ता अचानक बसों को रुकवाकर न केवल कागजात देख रहा है, बल्कि गाड़ी की फिटनेस की भी बारीकी से जांच कर रहा है।

सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाली बसें अब होंगी जब्त

इस औचक निरीक्षण के दौरान जजों की टीम सबसे अधिक ध्यान स्लीपर और लग्जरी बसों में सुरक्षा उपकरणों पर दे रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या बसों में इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) काम कर रहा है? क्या फायर एक्सटिंग्विशर (Fire Extinguisher) की एक्सपायरी डेट तो नहीं निकल गई? जीपीएस सिस्टम (GPS) चालू है या नहीं और बस में फर्स्ट एड किट उपलब्ध है या नहीं? यदि कोई बस इन मानकों पर फेल होती है, तो उसे मौके पर ही सीज किया जा रहा है और संबंधित बस ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जजों का सीधा संदेश है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाली किसी भी बस को राजस्थान की सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

स्कूल बस और बाल वाहिनी भी रडार पर

इतना ही नहीं, इस अभियान का दायरा सिर्फ लंबी दूरी की बसों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 'बाल वाहिनी' और निजी स्कूल बसों की भी गहन जांच की जा रही है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त निर्देश दिए हैं कि चाहे बस किसी भी राज्य में पंजीकृत हो, यदि वह राजस्थान की सीमा में है, तो उसे राज्य के सुरक्षा मानकों का पालन करना ही होगा। जजों की इस सक्रियता से अब ट्रांसपोर्ट माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में भारी कमी आएगी।

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