सचिन पायलट ने दोबारा दिखाए ‘बगावत’ के तेवर, क्या राजस्थान भी कांग्रेस के हाथ से जाएगा?

राजस्‍थान कांग्रेस में एक बार फिर विरोध के सुर उठने शुरू हो गए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दो माह की चुप्पी के बाद एक बार फिर मुखर हो गए हैं।

जयपुर। राजस्‍थान कांग्रेस में एक बार फिर विरोध के सुर उठने शुरू हो गए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दो माह की चुप्पी के बाद एक बार फिर मुखर हो गए हैं। पिछले साल बगावत के बाद बनी कांग्रेस की तीन सदस्यीय सुलह कमेटी की अब तक रिपोर्ट नहीं आने से नाराज पायलट ने कार्यकर्ताओं की सत्ता व संगठन में उचित भागीदारी को लेकर आवाज उठाई है। 
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एक अंग्रेजी अखबार को दिए साक्षात्‍कार में खुलकर नाराजगी जताते हुए पायलट ने कहा कि मुझे समझाया गया था कि सुलह कमेटी तेजी से एक्शन लेगी, लेकिन आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है और वे मुद्दे अब भी अनसुलझे ही हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए रात-दिन मेहनत की और अपना सब कुछ लगा दिया, उनकी सुनवाई ही नहीं हो रही है। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान उन वादों को पूरा करने में विफल रहा है जो उनसे किए गए थे, जब वे 18 विधायकों के साथ एक महीने के राजनीतिक ड्रामे के बाद पार्टी में लौटे थे। 

10 महीने हो गए हैं और उनसे किए वादे पूरे नहीं किए

पायलट ने कहा कि 10 महीने हो गए हैं और उनसे किए वादे पूरे नहीं किए हैं। इससे पहले अप्रैल में भी सचिन पायलट ने कहा था कि कई महीनों पहले एक कमेटी बनी थी। मुझे विश्वास है कि अब और ज्यादा देरी नहीं होगी। जो चर्चाएं की थीं और जिन मुद्दों पर आम सहमति बनी थी, उन पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसा होगा मुझे लगता है। 

कांग्रेस की अंदरूनी सियासत गर्मा गई

सचिन पायलट के ताजा बयान से एक बार फिर कांग्रेस की अंदरूनी सियासत गर्मा गई है। यूं तो पायलट समर्थक विधायक और कार्यकर्ता समय-समय पर मुखर होकर पायलट की ओर से कही बातों को दोहराते रहे है, लेकिन इस बार स्वयं पायलट का अपने खेमे की बात रखना काफी महत्वपूर्ण है। पायलट का बयान ऐसे वक्त आया है जब उनके एक समर्थक हेमाराम चौधरी ने इलाके के विकास के कामों की अनदेखी के मुद्दे पर 18 मई को इस्तीफा दे दिया था। वे अपने इस्तीफे पर अभी भी अड़े हुए हैं। 

सब्र का बांध टूट रहा

पायलट के इस विवादित बयान से लगता है उनके सब्र का बांध टूट रहा है। उल्‍लेखनीय है कि राजस्थान में पिछले साल सचिन पायलट खेमे की बगावत के बाद बनी केसी वेणुगोपाल, अहमद पटेल और अजय माकन की तीन सदस्यीय सुलह कमेटी की अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है और यहीं नाराजगी का बड़ा कारण बना हुआ हैं। इस सुलह कमेटी का काम सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की मांगों को सुनकर उसके आधार पर हाईकमान को रिपोर्ट देना था। कमेटी के एक सदस्‍य अहमद पटेल का देहांत हो चुका है। इस कमेटी को बने दस  माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट का अता-पता नहीं है।
 
इधर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने इस मामले में फिलहाल चुप्‍पी साधते हुए कहा है कि मेरे बोलने का अभी सही समय नहीं है, लेकिन सरकार में कुछ खाली पद उन्हें जल्दी ही भरा जाएगा।

 दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनोरिटी के लोग केवल वोट के वक्त याद आते हैं

सचिन पायलट के बयान के बाद मंगलवार को उनके समर्थक कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने भी गहलोत सरकार के खिलाफ एक बार फिर मार्चा खोल दिया। सोलंकी ने कहा कि इस सरकार में अब तक कांग्रेस के लिए लाठियां खाने वालों की सुनवाई नहीं हुई है। कांग्रेस पार्टी को जो दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनोरिटी के लोग वोट देते हैं, उन्हें हम बदले में क्या दे रहे हैं। केवल वोट के वक्त ये वर्ग याद आते हैं।
जहां एससी, एसटी, माइनॉरिटी के वोट नहीं हैं, वहां से कांग्रेस नेता चुनाव लड़कर देख लें, पता लग जाएगा। सोलंकी ने कहा, 10 महीने से कोई दलित कैबिनेट में नहीं है, हम किसके सामने अपना दुखड़ा रोएं। अगर नया मंत्री नहीं बनाना तो किसी राज्य मंत्री को ही कैबिनेट मंत्री बना दीजिए। सोलंकी ने यह बात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा के आवास पर ही मीडिया से कही।  

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