भारत को रणनीतिक क्षेत्र में मजबूत देख, बौखलाया चालबाज चीन

नई दिल्ली। चीन के साथ सन 1962 के युद्ध में मात खाने वाली भारतीय सेना ने 58 साल बाद मौजूदा टकराव के दौरान खासकर उन्हीं मोर्चों पर खुद को मजबूत किया है, जहां-जहां से उसने मात खाई थी। भारत की इन्हीं मजबूत स्थितियों को देख चीन बौखला गया है। इतना ही नहीं चीन का सरकारी मीडिया भी भारत पर भड़का हुआ है और भारत को 1962 से भी ज्यादा तबाह करने की धमकी दे डाली है। सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपने संपादकीय में भारत को धमकाते हुए लिखा है कि भारतीय सेना चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से खुद की रक्षा नहीं कर सकती है।
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पिछले युद्ध में चीन ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी दोनों हिस्सों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया था और भारत को शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इसीलिए मई से ही पूर्वी लद्दाख का पैंगोंग झील इलाका विवाद का बड़ा केंद्र रहा है। करीब 4270 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह झील करीब 135 किलोमीटर लंबी है। पीएलए के सैनिकों ने मई के शुरुआती दिनों से ही पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-4 से फिंगर-8 तक कब्जा कर लिया था। मौजूदा तनाव से पहले चीन का फिंगर-8 में एक स्थायी कैम्प था। चीन ने आठ किलोमीटर आगे बढ़कर फिंगर-4 पर पैंगोंग झील के किनारे आधार शिविर, पिलबॉक्स, बंकर और अन्य बुनियादी ढांंचों का निर्माण कर लिया। इससे पहले फिंगर-8 तक भारतीय सेना पेट्रोलिंग करती रही है। अब जब चीनी सैनिक फिंगर-4 से फिंगर-5 तक पीछे हुए हैं तो भारतीय सैनिकों को भी फिंगर-4 से फिंगर- 3 की तरफ पीछे आना पड़ा है। हालांकि चीनी सैनिक अभी भी रिज लाइन पर हैं
पैंगोंग झील के दोनों किनारों पर स्थित ऊंची-ऊंची बर्फीली पहाड़ियां युद्ध के दौरान रणनीतिक तौर पर इसलिए अहम मानी जाती हैं, इसलिए पैंगोंग इलाके में रणनीतिक रूप से अहम कुछ बिन्दुओं पर भारतीय सेना ने पहले ही अग्रिम मोर्चे पर तैनाती करके चीन के मुकाबले बढ़त बना ली है। पैंगोंग झील का दक्षिणी इलाका भारत के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भारतीय सेना की हमेशा मौजूदगी रही है। झील के उत्तरी क्षेत्र में भारतीय सैनिक सिर्फ पेट्रोलिंग करते रहे हैं। यही वजह है कि चीन सैन्य या कूटनीतिक वार्ताओं में भी यहां से भारतीय सैनिकों को हटाने की शर्त रख रहा है। झील का दक्षिणी हिस्सा चुशूल और रेजांग लॉ के करीब पड़ता है। अब चीन की ताजा हिमाकत के बाद भारत ने झील की सभी महत्वपूर्ण जगहों खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर अपनी तैनाती चीन के मुकाबले और ज्यादा मजबूत कर ली है। भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिणी इलाके में उन जगहों पर खुद को स्थापित कर लिया है जहां से जरूरत पड़ने पर चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जा सकता है, इसलिए चीन बौखला गया है।

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