बेटे ने 7 साल में 10 राज्य छान मारे, आखिरकार यूपी में मिली मां…छलक पड़े आंसू

कहते हैं ढूंढने पर तो भगवान भी मिल जाता है। बस इसी आस और उम्मीद में करीब सात साल से देश के 10 राज्यों को खंगालने के बाद मां को ढूंढ रहे उसके बेटे की तलाश पूरी हो गई।  

गोरखपुर। कहते हैं ढूंढने पर तो भगवान भी मिल जाता है। बस इसी आस और उम्मीद में करीब सात साल से देश के 10 राज्यों को खंगालने के बाद मां को ढूंढ रहे उसके बेटे की तलाश पूरी हो गई।

Son gets mother after seven years

दरअसल, परिवार पर दुखों के काले साए के मंडराने के बाद पश्चिम बंगाल के मालदा की रहने वाली दुलारी मंडल ने घर छोड़ दिया था। करीब 7 वर्षों के बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में वह बेटे सुजीत को मिलीं।

लम्हा इतना भावुक था कि वह अपने बेटे को देखकर फूट-फूटकर रोने लगीं। दुलारी मंडल के दो बेटे और एक बेटी थी। छोटे बेटे सुजीत ने बताया कि पिता मालदा में नौकरी करते थे, लेकिन वर्ष 2008 में पिता की मौत हो गई। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े बेटे के कंधों पर आ गई।

बड़ा बेटा रोजी-रोटी के लिए हरियाणा के पानीपत चला गया लेकिन 3 साल बाद उसकी मौत की खबर आ गई। यह दो बड़ी घटनाओं ने मां को अंदर से झकझोर कर रख दिया। इसके बाद सुजीत अपनी बहन के साथ मिलकर काम कर रहा था। 2013 में बहन की शादी तय थी लेकिन शादी के कुछ दिन पहले ही बहन की भी मौत हो गई। एक के बाद लगे इन झटकों ने मां को मानसिक रूप से बीमार बना दिया। एक दिन वह घर छोड़कर चली गई।

7 साल की तलाश, 10 राज्यों में ढूंढने के बाद मिलीं दुलारी

सुजीत ने बताया कि वह पिछले 7 साल से मां को ढूंढ रहा था। इस दौरान उसने देश के अलग-अलग इलाकों की खाक छानी। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों समेत 10 राज्यों में वह मां की तलाश करता रहा। इस दौरान उसने मिलने की आस नही छोड़ी और आख़िरकार उसकी उम्मीदें टूटने नहीं पाईं। यूपी के गोरखपुर जिले में जब मां और बेटे का मिलन हुआ तो लोगों की आंखें नम हो गईं।

बेटे को देखकर रुक नहीं रहे थे आंसू

घर छोड़कर निकली दुलारी 30 अगस्त को गोरखपुर रोडवेज पर पुलिस को मानसिक रूप से विक्षिप्त अवस्था में मिली थीं। पुलिस ने उन्हें मातृछाया संस्था को सौंप दिया। यहां उनका 4 महीने तक मनोचिकित्सक डॉक्टर अभिनव श्रीवास्तव ने इलाज किया। इलाज के 2 महीने बाद ही दुलारी की हालत में काफी सुधार दिखाई दिया।

नवंबर के पहले हफ्ते में बताया नाम-पता

दुलारी ने नवंबर के पहले हफ्ते में अपना नाम और पता बताया, जिसके बाद पुलिस ने संबंधित थाने में संपर्क किया और वहां से सुजीत को सूचना दी गई। मां की सूचना मिलने पर सुजीत गोरखपुर पहुंचा। सात साल बाद एक-दूसरे को देखकर मां-बेटे भावुक हो गए। इधर सुजीत संस्था को धन्यवाद देते हुए मां को अपने साथ ले गया।वहीं दुलारी ने बताया कि घर से निकलने के बाद वह कोलकाता, मुंबई और सिलीगुड़ी भी गई थीं लेकिन गोरखपुर कैसे पहुंचीं यह याद नहीं है।

मातृछाया संस्था के निदेशक आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि महिला के ठीक होने के बाद बेटे को सूचना दी गई। इसके जिसके बाद वह अपनी मां को साथ लेकर गया। उनके मुंबई तक पहुंचने की जानकारी हमें मिली है।

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