सोनिया का मोदी सरकार पर हमला, कहा- काले कानूनों को लेकर किसानों की मांग सही

सोनिया बोलीं, जन विरोधी सरकार किसानों को खून के आंसू रुला रही

नई दिल्ली॥ आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहा है। इस दौरान कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी दोनों विभूतियों को नमन किया। इसके साथ उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर मोदी सरकार पर निशाना साधा और किसानों की मांग को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों को खून के आंसू रुला रही है।

Sonia Gandhi

अपने वीडियो संदेश में सोनिया गांधी ने कहा, ‘मेरे प्यारे कांग्रेस के साथियों व किसान-मजदूर भाइयों और बहनों, आज किसानों, मजदूरों और मेहनतकशों के सबसे बड़े हमदर्द, महात्मा गांधी जी की जयंती है। गांधी जी कहते थे कि भारत की आत्मा भारत के गांव, खेत और खलिहान में बसती है। आज ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देने वाले हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती भी है। ऐसे में इन दो विभूतियों की जयंती के मौके पर देश का किसान और खेत मजदूर कृषि विरोधी तीनों काले कानूनों के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। अपना खून पसीना देकर देश के लिए अनाज उगाने वाले अन्नदाता किसान को मोदी सरकार खून के आंसू रुला रही है।’

अन्नदाता किसानों पर घोर अन्याय कर रहे हैं – कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘आज देश के प्रधानमंत्री हमारे अन्नदाता किसानों पर घोर अन्याय कर रहे हैं। किसानों के लिए बने कानून को लेकर उनसे सलाह-मशविरा तक नहीं किया गया। यही नहीं, उनके हितों को नजरअंदाज कर चंद पूंजीपति दोस्तों के हक़ में तीन काले कानून बना दिए गए। जब संसद में भी कानून बनाते वक्त किसान की आवाज नहीं सुनी गई, तो वे अपनी बात शांतिपूर्वक रखने के लिए महात्मा गांधी जी के रास्ते पर चलते हुए मजबूरी में सड़कों पर आए। लेकिन यहां भी लोकतंत्र विरोधी, जन विरोधी सरकार द्वारा उनकी बात सुनना तो दूर, उन पर लाठियां बरसाईं गईं।’

क्या मोदी सरकार ने इस बारे सोचा है

सोनिया गांधी ने कहा, ‘भाइयों और बहनों, हमारे किसान और खेत मजदूर भाई-बहन आखिर चाहते क्या हैं, सिर्फ इन कानूनों में अपनी मेहनत की उपज का सही दाम चाहते हैं और ये उनका बुनियादी अधिकार है। आज जब अनाज मंडियां खत्म कर दी जाएंगी, जमाखोरों को अनाज जमा करने की खुली छूट दी जाएगी और किसान भाइयों की जमीनें खेती के लिए पूंजीपतियों को सौंप दी जाएंगी, तो करोड़ों छोटे किसानों की रक्षा कौन करेगा। किसानों के साथ ही खेत-मज़दूरों और बटाईदारों का भविष्य जुड़ा है. अनाज मंडियों में काम करने वाले छोटे दुकानदारों और मंडी मजदूरों का क्या होगा। उनके अधिकारों की रक्षा कौन करेगा। क्या मोदी सरकार ने इस बारे सोचा है।’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा हर कानून जन सहमति से ही बनाया है। कानून बनाने से पहले लोगों के हितों को सबसे ऊपर रखा। लोकतंत्र के मायने भी यही हैं कि देश के हर निर्णय में देशवासियों की सहमति हो लेकिन क्या मोदी सरकार इसे मानती है। शायद मोदी सरकार को याद नहीं है कि वो किसानों के हक के ‘भूमि के उचित मुआवजा कानून’ को आर्डिनेंस के माध्यम से भी बदल नहीं पाई थी। तीन काले कानूनों के खिलाफ भी कांग्रेस पार्टी संघर्ष करती रहेगी। आज हमारे कार्यकर्ता हर विधानसभा क्षेत्र में किसान और मजदूर के पक्ष में आंदोलन कर रहे हैं। मैं दावे के साथ कहना चाहती हूं कि किसान और कांग्रेस का यह आंदोलन सफल होगा और किसान भाइयों की जीत होगी। जय हिंद।

 

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