विशेष : संगीत के साथ साहित्य साधना में भी बेजोड़ हैं शिवम

बेल्हा के लाल के 'राम नाम भजन' को मिल रही जबरदस्त लोकप्रियता

प्रतापगढ़। मंचों पर बतौर संचालक और रेडियो पर बतौर रेडियो जॉकी (आरजे) उनके इंटरव्यूज, रूपक और दूसरे कार्यक्रम सुने हों तो आपको मालूम होगा। वे गीत लिखते ही नहीं, गाते भी हैं। खुद धुन और संगीत में पिरोकर। स्तंभ-लेखन करते हैं। पत्र-पत्रिकाओं में दर्जनों लेख लिख चुके हैं।

आरजे, कवि-लेखक, पत्रकार-स्तंभ-लेखक, संगीतकार, मंच संचालक और लेखक-इन सब रूपों में उनका कौन सा रूप दूसरों पर भारी है, यह बताना जरा मुश्किल है। पर खुद ‘शिवम’ से पूछो तो वे बताएंगे ‘राम नाम की लगन’। उनके लेखन में, उनकी बातचीत में और सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह लगन साफ दिखती है। संयोग से यही नाम है उनके ताजातरीन भक्ति अलबम का भी।

‘शिवम’ जी का एक अन्य रूप दोस्त और हमदर्द के रूप में है। जब खुद मदद की जरूरत हो, उससे पहले ही वे दूसरों की मदद को हाथ बढ़ा देते हैं। इसीलिए उन्हें पसंद करने वालों की तादाद हर जगह और हर तबके में है। ‘शिवम’ की कशिश बढ़ाता है उनका पारदर्शी स्वभाव।

1981 में उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज तहसील/थाना स्थित थाहीपुर गांव में आचार्य जगदीश नारायण पांडेय और कृष्णा पांडेय के घर में जन्मे चार बहिन-भाइयों के बीच पले ‘शिवम’ को संगीत-प्रेम और साहित्य अनुराग घुट्टी में ही मिला। उन्होंने अपनी अलग पहचान दस वर्ष की नन्ही उम्र से अखबारों में प्रकाशित कविताओं से बनानी शुरु कर दी थी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक करने के साथ जब उन्होंने गायन में संगीत सीनियर डिप्लोमा और (प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से गायन संगीत में ‘प्रभाकर’ किया, तब से ही यह संकल्प उनके मन में ठौर बनाने लगा था, कि साहित्य के साथ कदाचित एक दिन संगीत भी उनका कॅरियर अवश्य बनेगा।

‘शिवम के मन में गीत-संगीत की नींव डाली डॉ. विद्याधर मिश्र ने, सम्प्रति जो बनारस घराने के गायक और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में संगीत के प्रोफेसर हैं। जाने-माने संगीतकार-गायक-गीतकार ‘पद्मश्री’ रवीन्द्र जैन की संगत ने शिवम के संगीत के संकल्प और पुख्ता किया।

आजकल शिवम ग्वालियर घराने के प्रतिनिधि संगीताचार्य पंडित विद्याधर व्यास से गुरु दीक्षा ले रहे हैं। यह लगन तब भी दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। प्रतापगढ़ ‘शिवम’ की जन्मभूमि और प्रयागराज शिक्षा-भूमि है तो साल 2004 से कर्मभूमि बनी मुंबई, जहां भविष्य की राह कदम खींचकर उन्हें ले आई। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज से पत्रकारिता एवं जनसंचार में परास्नातक डिप्लोमा साथ में था। मुंबई विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए किया।

‘ऊंचिया पहाड़ावाली मां’, ‘एक सोच’, ‘नाम भजो रे स्वानंद का’ और ‘नन्हीं-मुन्नी आंखों से’ जैसे ऑडियो अल्बम दे चुके इस उत्साही युवा प्रतिभा का ताजातरीन भक्ति संगीत ऑडियो अल्बम ‘राम नाम की लगन’ क्या नया गुल खिलाएगा, इसे लेकर भी संगीत जगत में काफी उत्सुकता है।

वैसे यह सुखद संयोग ही है कि जहाँ अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की तैयारी जोरों पर है वही, उसी ‘राम नाम की लगन’ रिलीज़ को तैयार है। बहरहाल, अलबम की विधिवत रिलीज की तैयारी में डूबे शिवम को उसकी सफलता में जरा भी आशंका नहीं।

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