फादर्स डे पर विशेष : ऐसे हुई शुरुआत

फादर्स डे की शुरुआत पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन पिता को समर्पित यह वैश्विक पर्व पश्चिमी देशों से पूरी दुनिया में फैला। जहां तक भारत की बात है तो यहां वर्ष में दो बार चैत मॉस और अश्वनी मास के कृष्ण पक्ष में पितृ पखवारा होता है। पिता समेत सभी पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। लेकिन पिछले दो दशकों से फादर्स डे भारत में भी मनाया जाने लगा है। फादर्स डे मनाने की एक निश्चित दिन भी नहीं है, लेकिन दुनिया के अधिकांश देशों में यह तून माह के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। वैसे फादर्स डे की उत्पत्ति के बारे में दो कहानिया काफी कुछ स्पष्ट हैं।

पहली कहानी के अनुसार 1910 में, मदर्स डे चर्च सेवा के दौरान वाशिंगटन के सोनोरा स्मार्ट डोड नाम के एक व्यक्ति ने सुझाव दिया कि एक मां की तरह पिता को भी समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए। जिस तरह हम अपनी माताओं को प्यार और सम्मान देते हैं और मदर्स डे मनाते हैं। उसीतरह हमें पितृ दिवस भी मनाना चाहिए। दरअसल सोनोरा स्मार्ट डोड जब वह 16 साल की थी तब उसने अपनी मां को खो दिया था और उसके पिता ने उसकी और उसके अन्य पांच भाई-बहनों का पालन-पोषण किया था।

कहानी के अनुसार सोनोरा स्मार्ट डोड के पिता एक अमेरिकी गृहयुद्ध वेटरन थे। वह गई और स्पोकेन के मंत्रिस्तरीय संघ से संपर्क किया और उनसे पांच जून को फादर्स डे घोषित करने का निवेदन किया। इसी दिन उनके पिता का जन्मदिन था। हालांकि मंत्री ने सोनोरा द्वारा सुझाई गई तिथि के बजाय 19 जून को फादर्स डे मनाने का फैसला किया। उसी समय से वाशिंगटन में हर वर्ष जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाने की परंपरा शुरू हुई।

वाशिंगटन में शुरू हुए इस नए पर्व की अवधारणा को जल्द ही अन्य शहरों में चुना गया। अमेरिका के विभिन्न राज्य और संगठन फादर्स डे को वार्षिक कार्यक्रम घोषित करने के लिए पैरवी कर रहे थे। 1919 में राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इस विचार को मंजूरी दी। राष्ट्रपति केल्विन कूलिज ने इसे 1924 में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाया। 1966 में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने एक राष्ट्रपति पर हस्ताक्षर करके फादर्स डे को एक राष्ट्रीय स्मारक दिवस बनाया और जून में तीसरा रविवार फादर्स डे होगा। 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इस उद्घोषणा को स्थायी बना दिया।

दूसरी कहानी के अनुसार ग्रेस गोल्डन क्लेटन उन बच्चों के लिए फादर्स डे स्थापित करना चाहती थी, जिन्होंने एक खदान विस्फोट में अपने पिता को खो दिया था। इस दुर्घटना ने कस्बे के लगभग 360 लोगों की जान ले ली। क्लेटन चाहती थी कि बच्चों के लिए अपने पिता का सम्मान करने और उन्हें याद करने का एक दिन होना चाहिए। इस तरह सोनोरा स्मार्ट डोड के प्रस्ताव के बाद फादर्स डे की शुरुआत हुई और यह एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम बन गया।

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