श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद : डीजे कोर्ट में सुनवाई शुरू, जज रानी ठाकुर सुनाएंगी आज ही निर्णय

शुक्रवार  सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन मथुरा पहुंच गए। जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में दोपहर दो बजे सुनवाई शुरू हो चुकी है। जिला जज दलीलें सुन रही है। सायं तक फैसला हो सकता है या फिर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट की तरह खारिज भी हो सकता है। फिलहाल पांच बजे तक निर्णायक निर्णय आने की उम्मीद है।

मथुरा। श्रीकृष्ण भगवान विराजमान मामले को लेकर डीजे कोर्ट में शुक्रवार दोपहर दो बजे सुनवाई होना शुरू हो गई है,  सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता द्वारा श्रीकृष्ण जन्म भूमि के मालिकाना हक और परिसर को मस्जिद मुक्त बनाने की मांग को लेकर जनपद के जिला जज साधना रानी ठाकुर ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता द्वारा दलील सुनने के बाद अवर कोर्ट की पत्रावली को तलब किया और सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित की गई थी।
Sri Krishna Janmabhoomi dispute
शुक्रवार  सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन मथुरा पहुंच गए। जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में दोपहर दो बजे सुनवाई शुरू हो चुकी है। जिला जज दलीलें सुन रही है। सायं तक फैसला हो सकता है या फिर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट की तरह खारिज भी हो सकता है। फिलहाल पांच बजे तक निर्णायक निर्णय आने की उम्मीद है।
विदित रहे कि श्रीकृष्ण विराजमान और लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री समेत आठ लोगों ने 25 सितंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दावा दायर किया था। इसमें 10 अगस्त 1968 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के बीच हुआ समझौता रद करने और मस्जिद हटाकर जमीन मंदिर को दिए जाने की प्रार्थना की गई थी। अदालत ने सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार न होने की बात कहकर 30 सितंबर को दावा खारिज कर दिया था।
इस पर 12 अक्टूबर को जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में अपील दायर की गई। अदालत ने वाद की पोषणीयता पर करीब दो घंटे तक सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को दोबारा सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित कर दी। वादी रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि वह अपने अधिवक्ता विष्णु जैन और हरिशंकर जैन के जरिए अदालत में अपना पक्ष रखेंगी। अदालत सुनवाई के बाद ये फैसला लेगी कि ये वाद चलेगा या खारिज होगा।

यह रहा मामला

दरअसल, ब्रिटिश शासन काल में 1815 में नीलामी के दौरान बनारस के राजा पटनी मल ने इस जगह को खरीदा और 1940 में पंडित मदन मोहन मालवीय जब मथुरा आए तो श्रीकृष्ण जन्म स्थान की दुर्दशा को देखकर दुखी हो गए. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने भी मदन मोहन मालवीय जी से कहा कि यहां भव्य मंदिर बनना चाहिए।
मदन मोहन मालवीय जी ने मथुरा के उद्योगपति जुगल किशोर बिरला को जन्मभूमि पुनरुद्वार के लिए पत्र लिखा. जिसके बाद 21 फरवरी 1951 में श्री कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट की स्थापना की गई। 12 अक्टूबर 1968 को कटरा केशव देव मंदिर की जमीन का समझौता श्री कृष्ण जन्मस्थान सोसायटी द्वारा किया गया। 20 जुलाई 1973 को यह जमीन डिक्री की गई। डिक्री रद्द करने की मांग को लेकर अधिवक्ता ने जिला जज कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया।

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