नियमित दवा और पौष्टिक आहार से सुनीता ने दी टीबी को मात, अब कर रही हैं मरीजों का फाॅलोअप

परतावल ब्लाॅक की सुनीता (35) (बदला हुआ नाम) टीबी की नियमित दवा तथा पौष्टिक आहार लेकर स्वस्थ हो गयीं। अब वह टीबी चैंपियन बन कर क्षय...

महराजगंज। परतावल ब्लाॅक की सुनीता (35) (बदला हुआ नाम) टीबी की नियमित दवा तथा पौष्टिक आहार लेकर स्वस्थ हो गयीं। अब वह टीबी चैंपियन बन कर क्षय रोगियों का फाॅलोअप करते हुए उन्हें नियमित दवा खाने और चिकित्सक के सलाह के बिना दवा न छोड़ने की सलाह दे रहीं हैं। साथ ही टीबी से बचने के लिए जन समुदाय को लक्षण बता कर जागरूक भी कर रहीं हैं। सुनीता ने बताया कि वह जनवरी 2021 में बुखार से पीड़ित हुईं। दवा खाती थीं तो बुखार उतर जाता था, लेकिन फिर चढ़ जाता था। धीरे-धीरे सिर का बाल भी झड़ने लगा। इसके बाद इलाज कराने महराजगंज जिला अस्पताल गयीं।

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वहां चिकित्सक ने एक्स-रे कराने की सलाह दी। एक्स-रे कराया तो रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि वह टीबी की मरीज हैं। वहाँ से वह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परतावल आईं। वस्तुस्थिति से वरिष्ठ टीबी उपचार पर्यवेक्षक सुनील कुमार सिंह से अवगत कराया।
वहीं परतावल सीएचसी से टीबी की दवा मिली और साथ ही पौष्टिक आहार लेते रहने की सलाह भी। जब तीन महीना दवा खा ली तो सेहत में अपेक्षित सुधार दिखा। वजन बढ़ने के साथ आवाज भी बदलने लगी। इलाज के दौरान उन्हें नि:क्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह 500 रुपये भी मिले। इस पैसे को भी सूखा फल आदि पर खर्च किया, जिससे सेहत में और तेजी से सुधार हुआ। छह माह तक नियमित दवा का सेवन किया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

सुनीता की रूचि देख कर जिला क्षय रोग केन्द्र द्वारा उन्हें टीबी चैंपियन घोषित किया गया और क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में वह दो महिला टीबी रोगियों को फाॅलोअप करती हैं। इसमें से एक महिला की दवा मई 2022 से तो दूसरे की मार्च 2022 से शुरू हुई है। वह दोनों टीबी रोगियों के घर जाकर समय-समय पर सचेत करतीं हैं कि टीबी की दवा नियमित खानी है। बीच में दवा नहीं बंद करनी है। जब चिकित्सक कहेंगे तभी दवा बंद करनी है। जब तक दवा चलेगी तब तक सरकार से नि:क्षय पोषण योजना के तहत पांच सौ रुपये प्रति माह मिलेंगे। इस धन को पौष्टिक आहार लेने में खर्च करना है।

वरिष्ठ टीबी उपचार पर्यवेक्षक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि सुनीता ( बदला हुआ नाम) की दवा फरवरी 2021 से शुरू होकर जुलाई 2021 तक ( छह माह) दवा चली। सुनीता ने नियमित दवा और पौष्टिक आहार लिया। सुनीता में जागरूकता देख विभाग ने उन्हें टीबी चैंपियन बना दिया। वह टीबी रोगियों को ठीक से फाॅलोअप कर रहीं हैं। इनके द्वारा टीबी रोगियों के घर दवा भी पहुँचा दी जाती है। वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परतावल से 141 टीबी रोगियों का इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार 14 दिनों से बुखार आता हो, खांसी में खून आता हो, वजन घट रहा हो, थकान महसूस होती हो, सांस लेने में तकलीफ होती हो तो उसे जांच करानी चाहिए। क्योंकि यह टीबी के लक्षण हैं।

यहां होती है बलगम की जांच

जिला कार्यक्रम समन्वयक हरिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि जिन 27 केंद्रों पर बलगम के जरिये जांच की सुविधा है, उनमें जिला क्षय रोग केन्द्र, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घुघली, परतावल, मंसूरगंज, सिसवा, निचलौल, मिठौरा, नौतनवा,लक्ष्मीपुर, अड्डा बाजार, बृजमनगंज, धानी, फरेन्दा, अर्बन हेल्थ सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पनियरा, रतनपुर, बहदुरी, तथा नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरंदरपुर,कोल्हुई, बरगदवा, जहदा, लक्ष्मीपुर, श्यामदेउरवा और हरपुर महंथ केन्द्र शामिल हैं।

दो सालों में नि:क्षय पोषण योजना के तहत हुआ 1.51 करोड़ का भुगतान

जिला कार्यक्रम समन्वयक ने बताया कि दो सालों में कुल 5937 मरीजों का उपचार किया गया। नि:क्षय पोषण योजना के तहत करीब एक करोड़ इक्यावन लाख रूपए का भुगतान भी किया गया। इसमें से करीब 68.22 लाख का भुगतान वर्ष 2020 में तथा करीब 83.11लाख का भुगतान वर्ष 2021 में किया गया।