यहां के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण की दृष्टि से, सुरक्षित और किफ़ायती कैटलिस्टों का किया विकास

आईआईटी मंडी की एक शोध टीम संस्थान के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेंकट कृष्णन के नेतृत्व में पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित और किफ़ायती कैटलिस्ट विकसित करने में जुटी है।

मंडी, 09 अक्तूबर यूपी किरण। आईआईटी मंडी की एक शोध टीम संस्थान के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेंकट कृष्णन के नेतृत्व में पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित और किफ़ायती कैटलिस्ट विकसित करने में जुटी है। इसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में रसायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में होगा। शोध कार्य में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ के शोधकर्ता भी सहयोग दे रहे हैं।
किसी प्रतिक्रिया में कैटलिस्ट डालने से उसकी दर बढ़ती है जबकि कैटलिस्ट खुद खत्म नहीं होता है। सुलभ कार्बन आधारित यह कैटलिस्ट हाइड्रोजनीकरण के लिए बना है जो प्रतिक्रियाओं की एक श्रेणी है जिसका कॉस्मेटिक, फार्मास्युटिकल, एग्रोकेमिकल आदि विभिन्न उद्योगों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
रॉयल केमिकल सोसाइटी ने शोध के परिणाम प्रतिष्ठित जर्नल ग्रीन केमिस्ट्री में प्रकाशित किया है। डॉ. वेंकट कृष्णन के इस शोध पत्र के सह-शोध विद्वान आईआईटी मंडी की सुश्री प्रियंका चौधरी, डॉ. आशीष बहुगुणा और अजय कुमार और आईआईटी रोपड़ में रसायन विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सी.एम. नागराजा और उनके शोध विद्वान संदीप सिंह धनखड़ हैं। डॉ. वेंकट कृष्णन ने बताया कि हम कैटेलाइसिस के व्यावहारिक महत्व को कतई कम नहीं आंक सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में उपयोगी लगभग सभी सिंथेटिक उत्पाद आज औद्योगिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं, जिनमें कैटलिस्ट का उपयोग होता है। उनके अनुसार कैटलिस्ट किसी प्रतिक्रिया को तेज करता है या अन्यथा कठिन प्रतिक्रियाओं का होना मुमकिन बनाता है और इस तरह उत्पाद की मात्रा या दर बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन उद्योगों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं के पर्यावरण पर बुरे प्रभाव को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ रही है। इसलिए पर्यावरण अनुकूल कैटलिस्ट विकसित करने की अत्यधिक आवश्यकता है। ऐसे कैटलिस्ट जो पर्यावरण प्रदूषण बढऩे की वजह नहीं बने क्योंकि आमतौर पर औद्योगिक प्रक्रियाओं से प्रदूषण का सीधा संबंध देखा जाता है।
डॉ. कृष्णन ने बताया कि हाइड्रोजनीकरण के कैटलिस्ट विशेष रसायन हैं जो सस्ते और गैर-खतरनाक हाइड्रोजन डोनर से हाइड्रोजन के सब्सट्रेट पर स्थानांतरण में मदद करते ह,ैं जिन्हें लक्षित उत्पाद में बदला जा सकता है। आज हाइड्रोजनीकरण की प्रतिक्रियाओं में बतौर कैटलिस्ट रोडियम, इरीडियम, प्लैटिनम और रूथेनियम जैसी कीमती धातुएं इस्तेमाल की जाती हैं जिससे स्वाभाविक रूप से संश्लेषण प्रक्रिया का खर्च बढऩे के अलावा पर्यावरण संकट बढ़ता है। इतना ही नहीं, ये धातु कैटलिस्ट आसानी से वापस नहीं प्राप्त किए जा सकते हैं। आईआईटी मंडी की टीम ने ग्रेफाइटिक कार्बन नाईट्राइड को चुना है। यह लक्षित प्रतिक्रिया के लिए धातु रहित कैटलिस्ट है जिसमें दिलचस्प रासायनिक और भौतिक गुण पाए जाते हैं।
हाइड्रोजनीकरण की प्रतिक्रियाओं में टीम ने अपने कैटलिस्ट की अच्छी उत्प्रेरक क्षमता का प्रदर्शन करने के साथ प्रतिक्रिया के मानकों का भी अनुकूलन किया और पर्यावरण अनुकूल मानकों का आकलन किया। उन्होंने कहा कि हमारे कैटलिस्ट का एक अतिरिक्त लाभ यह है कि यह आसानी से वापस प्राप्त किया जा सकता है और उत्प्रेरक प्रक्रिया में किसी भी कमी के बिना कई बार-बार उपयोग किया जा सकता है। इस गुण की वजह से यह किफायती भी है और इसके साथ प्रतिक्रिया करने का पर्यावरण संबंधी लाभ भी है। यह नया विकसित प्रोटोकॉल हमें औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन में बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए एक पर्यावरण अनुकूल, सुरक्षित और किफायती साधन देगा।

 

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