Chanakya Niti: चाणक्य की 9 अनमोल बातों में छिपी है जीवन की सफलता, जो अमल करते हैं उन पर रहती है लक्ष्मी जी की कृपा

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में हरेक तरह व प्रकार से सफल होना चाहता है। लेकिन चाणक्य के अनुसार सफलता उसी व्यक्ति के कदम चूमती है जो इन बातों पर अमल और विश्वास करते है। इस तरह के लोगों पर लक्ष्मी माता की विशेष कृपा बनी रहती हैं। इतना ही नही जीवन को प्रेरित करने मे भी चाणक्य नीति (Chanakya Niti) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और शायद यही कारण है की कई वर्ष के बीत जाने के बाद भी लोग आचार्य चाणक्य की कही गई नीतियो पर विश्वास करते है और उस पर अमल भी करते है।

Chanakya Niti

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आचार्य चाणक्य की बात माने तो प्रत्येक व्यक्ति जीवन में होने के लिए संघर्ष करता है। इसमे कुछ मनुष्यो को सफलता मिल जाती है और कुछ मनुष्य सफलता पाने की कोशिश में कभी कभी असफल भी हो जाते हैं।आचार्य चाणक्य के अनुसार असली सफलता वही होती है जो कि दूसरे व्यक्ति को भी सफल बनाने के लिए प्रेरित किया करे। आचार्य चाणक्य यह भी कहते है कि नियम और अनुशासन के द्वारा प्राप्त सफलता स्थाई रूप से रहती है।

इस तरह के धैर्यवान लोगों पर माता लक्ष्मी जो कि धन की देवी है वो भी बहुत प्रसन्न रहती है। आचार्य चाणक्य बोलते है कि जो लोग भी अपने जीवनकाल में सफल होना चाहते हैं उन्हें इन बातों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए –

1•आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के कही गई नीति के अनुसार किसी भी मनुष्य को जीवन में पैसे ,भोजन और सुंदरता के बारे में सोचकर के कभी भी असंतोष नही करना चाहिए। व्यक्ति के पास जितना ही है व्यक्ति को उसी में हमेशा खुश रहना चाहिए।

2•आचार्य चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के मुताबिक ज्ञान एक ऐसी चीज है जिस के बिना कोई भी व्यक्ति जीवन में सफलता को हासिल नहीं कर सकता है। इसलिए अपने ज्ञान को हमेशा बढाना चाहिए यह एक ऐसी चीज है जो प्रत्येक व्यक्ति के पास हमेशा रहनी चाहिए ।

3•आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के हिसाब से कोई भी मनुष्य किसी भी तरह का जब भी कोई कार्य आरंभ करे उस से पहले मनुष्य को उस कार्य के अच्छे और बुरे पक्ष पर विचार अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है।

4•चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के मुताबिक विवाह के बाद मनुष्य को किसी दूसरी महिला की ओर आकर्षित नहीं होना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से पारिवारिक और समाजिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।

5•चाणक्य नीति (Chanakya Niti) कहती है कि व्यक्ति को कभी भी इस तरह के लोगों से मित्रता व दोस्ती नहीं करनी चाहिए और न ही रखना चाहिए जो समाज मे आपसे कम या अधिक प्रतिष्ठा रखते हों। आचार्य चाणक्य के अनुसार इस तरह के लोगों की दोस्ती व मित्रता कभी भी आपको खुशी नहीं देगी,वरन् इस प्रकार के लोगों के कारण आपको अपमान सहना पड़ सकता है अथवा समाज मे हानि उठानी पड़ सकती है।

6•आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के नीतियों के मुताबिक व्यक्ति को दूसरे व्यक्तियों की गलतियों से भी सीख लेनी चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते है यदि यह प्रयोग स्वयं पर करके सीखने की कोशिश की जाये तो इसके लिए अपनी आयु भी कम पड़ जाएगी। इसलिए जो व्यक्ति स्वयं की गलतियों के साथ साथ दूसरे व्यक्तियों की गलती से भी सीखते हैं, वह जीवन में बहुत सफलताएं मिलती हैं।

7•आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने अपनी नीति मे इस बात का भी उल्लेख किया है कि व्यक्ति को धन को व्यय व खर्च करते वक्त सदैव सावधानी बरतनी चाहिए। आचार्य चाणक्य के हिसाब से ऐसे लोग जो कि धन को अनावश्यक चीजों पर व्यय व खर्च करते है उनके पास कभी भी धन नहीं ठहरता है। या फिर इस तरह के व्यक्ति जो कि आय से अधिक धन को खर्च करते है। इस तरह के व्यक्ति जो कि अच्छी खासी आय होने के बावजूद बाहरी दिखावे पर अनावश्यक खर्च व व्यय करते है उन्हें अधिकतर समय धन की कमी का सामना करना पड़ता है। और यदि व्यक्ति इन सभी अपव्यय पर रोक नही लगता है तो उसे धन की कमी से जल्दी से छुटकारा मिलना आसान नही होता है। इसलिए जहां तक संभव हो सके धन के अपव्यय से बचना चाहिए।

8• आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के मुताबिक आप के पास जब भी धन आवें थोड़ी सी बचत अवश्य करना चाहिए। चाणक्य नीति (Chanakya Niti) कहती है कि जितना भी हो सके धन की बचत सदैव करनी चाहिए। जो भी लोग धन का संचय नहीं कर पाते हैं उन लोगो को भविष्य में बहुत मुसीबतों व परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धन की इज्जत हमेशा करनी चाहिए। ऐसा नही करने पर माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। जिस के फलस्वरूप धन नष्ट हो सकता है।आचार्य चाणक्य कहते है कि धन एक ऐसी चीज है जो बुरे समय में एक सच्चे मित्र की भांति भूमिका को निभाता है। और यह तथ्य सत्य है कि व्यक्ति के जीवन मे बुरा समय कभी भी आ जाता है। और यदि व्यक्ति के पास मे धन जब होता है तो उस विषम परिस्थिति मे भी व्यक्ति का आत्मविश्वास बना रहता है।जिस के फलस्वरूप समस्याओं का निदान आसानी से हो जाता है।

9• आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार आवश्यकता के अनुसार ही धन का व्यय व खर्च करना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते है जो भी बेवजह एवं बेमतलब का धन का व्यय व खर्च करता है। उस व्यक्ति से लक्ष्मी जी रूठ जाती हैं और उस स्थान को अथवा उस व्यक्ति को छोड़कर के वहां से चली जाती हैं। आचार्य चाणक्य के हिसाब से हर किसी व्यक्ति को अपनी जरूरतों का पूरा ज्ञान होना चाहिए। जिस से बेवजह कभी-कभी व्यक्ति भोग विलास की वस्तुओ पर इतना धन खर्च और व्यय कर देता है, जिसकी उसको कोई जरूरत ही नहीं होती है। और इस बेमतलब के खर्चे के कारण व्यक्ति की यही आदत आगे चलकर व भविष्य मे व्यक्ति के धन की कमी का परमुख कारण बनती है।

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