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लोकतंत्र की यही है नैतिकता ! राजस्थान के सीएम समेत पूरी सरकार भागने को मजबूर

शंभू नाथ गौतम वरिष्ठ पत्रकार

राजस्थान की चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए अपनाया जा रहा हथकंडा लोकतंत्र के लिए सबसे काला अध्याय कहा जा सकता है । पिछले लगभग एक माह से राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को गिराने के लिए राजनीति में नैतिकता पूरी ताक पर रख दी गई है । राज्य की सत्ता को अस्थिर करने और गिराने के लिए जो खेल खेला जा रहा है, वह बताता है कि आज राजनीति कहां आ खड़ी हुई है ।

ashok gehlot sarkar

पहले केंद्र सरकार फिर सचिन पायलट उसके बाद राज्यपाल कलराज मिश्र के गहलोत सरकार पर दबाव बनाने से लोकतंत्र का जैसे पूरी तरह गला घोटा जा रहा है । अभी कुछ दिनों पहले तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने विधायकों को जयपुर के होटल में कैद किए हुए थे । लेकिन अब शनिवार को मुख्यमंत्री गहलोत समेत राजस्थान की पूरी सरकार ही जयपुर से लगभग 550 किलोमीटर दूर जैसलमेर भागने को मजबूर हो गए हैं ।

कांग्रेस के विधायक और मंत्री अगर जयपुर में रहते तो मुख्यमंत्री गहलोत को लग रहा था कि भाजपा उनकी सरकार को खरीद-फरोख्त कर सकती है । हम आपको बता दें कि जयपुर के फेयरमॉन्ट होटल में 18 दिन कैद रहने के बाद विधायक जैसलमेर शिफ्ट किए गए । हॉर्स ट्रेडिंग का खतरा बढ़ने की वजह से मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने गुट के विधायकों को राजधानी जयपुर से जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस होटल में पहुंचा दिया है।

खुद गहलोत 15 मंत्री और 73 विधायकों समेत कुल 88 विधायक शुक्रवार को शिफ्ट हो गए। 4 विधायकों के आज मुख्यमंत्री गहलोत जैसलमेर पहुंचे गए हैं । यानी कि अब राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है । सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले कई दिनों से राज्य की कानून व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही है । इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मुख्यमंत्री समेत तमाम मंत्री इधर-उधर भाग रहे हैं ।

14 अगस्त से राज्य में विधानसभा सत्र शुरू होने के आसार हैं—

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कई बार राज्यपाल कलराज मिश्र से विधानसभा सत्र करने की सिफारिश को आखिरकार राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है । अब राज्य का विधानसभा सत्र 14 अगस्त से चलने के आसार हैं । तब तक गहलोत के विधायक और मंत्री जैसलमेर में ही एक होटल में कैद रहेंगे । संभव है एक-दो दिन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जयपुर लौट सकते हैं ।

मुख्यमंत्री गहलोत और उनके मंत्री विधायकों जयपुर छोड़ने की सबसे बड़ी वजह यह रही कि केंद्रीय एजेंसियां जयपुर में ज्यादा सक्रिय हो रही थीं। बताया जा रहा है कि सरकार को जयपुर के फेयरमॉन्ट होटल, जहां गहलोत गुट के विधायक 18 दिन रहे, उस होटल में बड़ी कार्रवाई होने का शक था। दूसरी और जयपुर में मंत्री और विधायकों के रहने से अशोक गहलोत को अब भरोसा नहीं था । दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने राज्य में कानून व्यवस्था, कोरोना महामारी को लेकर कहा कि इस पर भी मैं हर रोज ध्यान दे रहा हूं, लेकिन अपनी सरकार बचाना भी जरूरी है, इसीलिए मैंने अपने विधायकों व मंत्रियों को जैसलमेर भेजा है ।

गहलोत सरकार के जैसलमेर भागने पर भाजपा ने किया घेराव—

गहलोत सरकार के राजधानी जयपुर छोड़कर जैसलमेर भागने पर भाजपा ने कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का घेराव किया है । राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने अशोक गहलोत के विधायकों को जैसलमेर ले जाने पर कहा कि जब कांग्रेस के विधायक एकजुट है तो गहलोत अपने विधायकों और मंत्रियों को क्यों भगा रहे हैं । राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पूनियां ने ट्वीट किया कि सब एक हैं, कोई खतरा नहीं है, लोकतंत्र है, सब ठीक है तो बाड़ाबंदी क्यों? और बिकाऊ कौन है? उनके नाम सार्वजनिक करो; बाड़े में भी अविश्वास! जयपुर से जैसलमेर के बाद आगे तो पाकिस्तान है ।

आपको बता दें कि गुरुवार को मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा था कि आगामी विधानसभा सत्र की तारीख तय होने के बाद राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त का ‘रेट बढ़ गया है। इसके बाद ही विधायकों को जैसलमेर ले जाने का फैसला किया गया है । गहलोत ने आगे कहा कि हमारे विधायकों को और उनके परिवार वालों को दबाव के साथ धमकी भरे फोन भी आने लगे थे । हमने इसलिए विधायकों और मंत्रियों को जैसलमेर शिफ्ट करने का फैसला किया है । सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार को इतना डराया और धमकाया जा सकता है कि वह भागने पर ही मजबूर हो जाए ।

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