ये है दुनिया का सबसे अद्भुत पिरामिड, जहां ताली बजाने पर सुनाई देती है पक्षियों की चहचहाट की आवाज

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं जो हैरान करने वाली और रहस्यमयी हैं. इन रहस्यों के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया है। ऐसा ही एक रहस्य दुनिया के सबसे पुराने पिरामिडों में से एक है, जिसे मेक्सिको के युकाटन क्षेत्र में बनाया गया है। इस मिरामी को चिचेन इट्ज़ा चिरप के नाम से जाना जाता है। जिसे मेक्सिको की सबसे रहस्यमयी कलाकृति भी माना जाता है। यह पिरामिड मेक्सिको की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है, साथ ही यह पिरामिड कई अजूबों से भरा हुआ है। दरअसल, चिचेन इट्ज़ा एक कोलंबियाई मंदिर है, जिसे माया जनजाति सभ्यता के लोगों ने बनवाया था।

Pyramid_Mexico_198902_730x419इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अगर कोई यहां नीचे खड़े होकर ताली बजाता है, तो ध्वनि परावर्तित हो जाती है और उसके बाद यह पक्षियों की चहचहाहट में बदल जाती है। आपको बता दें कि मेक्सिको का ‘चिचेन इट्ज़ा’ मंदिर खूबसूरत निर्माणों में से एक है, लेकिन इसकी सबसे रहस्यमयी बात यहां की परछाईं से सुनाई देने वाली आवाज है। ध्वनि विशेषज्ञों के अनुसार इस पिरामिड में ताली बजाने पर ध्वनि परावर्तित होकर क्वेट्ज़ल नाम के पक्षी की आवाज की तरह आती है। इतना ही नहीं अगर कई लोग एक साथ ताली बजाएं तो आपको लगेगा कि कई पक्षी बोल रहे हैं।

1998 में, कैलिफोर्निया के ध्वनि विशेषज्ञ डेविड लुबमैन ने चिचेन इट्ज़ा पर शोध किया। उनके बाद कई ध्वनि विशेषज्ञ यहां शोध करने के लिए आए लेकिन वे सभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे। आज तक कोई भी वैज्ञानिक यह नहीं बता पाया है कि चिचेन इट्ज़ा में ताली बजाने पर पक्षियों की आवाज़ क्यों दिखाई देती है। इसके अलावा, चिचेन इट्ज़ा की एक विशेषता यह है कि यदि कोई इसके आधार पर खड़ा होकर ढोल बजाता है या चिल्लाता है, तो हर बार एक अलग प्रकार की ध्वनि परिलक्षित होती है।

ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि माया सभ्यता के लोग इन सब बातों से वाकिफ थे या उन्होंने ऐसी आवाजों को प्रतिबिंबित करने के लिए इस पिरामिड का निर्माण किया था। इसके अलावा अगर इस पिरामिड के एक तरफ सीढि़यों पर सूरज की रोशनी पड़ती है तो ये सांप की तरह दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं बेल्जियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मिको डिक्लर्क ने भी इस पिरामिड पर शोध किया था।

इस शोध में उन्होंने बताया कि पिरामिड की सीढ़ियां चढ़ते समय ऐसी आवाज निकलती है, जैसे बारिश का पानी बाल्टी में गिर रहा हो। आपको बता दें कि माया सभ्यता के लोग वर्षा के देवता की पूजा करते थे, इसलिए यह संयोग नहीं हो सकता। इस पिरामिड से तरह-तरह की धुनें सुनाई देती हैं।