ममता से इस मंत्री की बढ़ रही है दूरी, भाजपा में हो सकते है शामिल

एक दौर में वह ममता के बेहद करीबी रहे हैं और हकीकत यह भी है कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर अगर ममता बनर्जी के बाद कोई ऐसा नेता है जिसका जनाधार सबसे बड़ा है तो वह शुभेंदु अधिकारी हैं।

कोलकाता, 10 सितम्बर । पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री और जंगलमहल क्षेत्र में बड़ा जनाधार रखने वाले शुभेंदु अधिकारी की दूरी सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बढ़ने लगी है। एक दौर में वह ममता के बेहद करीबी रहे हैं और हकीकत यह भी है कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर अगर ममता बनर्जी के बाद कोई ऐसा नेता है जिसका जनाधार सबसे बड़ा है तो वह शुभेंदु अधिकारी हैं।

mamta banerjee

हालांकि ममता के बजाय वह मुकुल रॉय के करीबी रहे हैं।राय ने 2017 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। उसके बाद भी कई बार अटकलें लगाई गईं कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले तो इन कयासों को सबसे अधिक बल मिला था लेकिन वह तृणमूल के साथ रहे और लोकसभा चुनाव में पार्टी की कई जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।

ममता बनर्जी की उपलब्धियों का कोई जिक्र नहीं

अब 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी वजह यह है कि हाल ही में उन्होंने एक जनसभा की है, जिसमें लगाए गए बैनर पोस्टर पर ममता बनर्जी की तस्वीर तक नहीं थी। यहां तक कि संबोधन के दौरान भी उन्होंने ममता बनर्जी की उपलब्धियों का कोई जिक्र नहीं किया और अपने कार्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। कुल मिलाकर कहें तो 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले जंगलमहल में राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है।

तृणमूल कांग्रेस में ही वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिल रही है। मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम मेदिनीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पोस्टर के बगैर कई जगहों पर सभाएं की हैं। पोस्टर में सिर्फ उनकी तस्वीर है। इस घटना से तृणमूल में बेचैनी बढ़ गई है। इतना ही नहीं पिछले दिनों वह हूल दिवस पर राज्य सरकार के समारोह में शामिल नहीं हुए, लेकिन आदिवासियों के अन्य कार्यक्रमों में शामिल हुए। हूल दिवस समारोह में पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी थे लेकिन उन्हें उस समय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब लोगों ने शुभेंदु अधिकारी के समारोह में नहीं आने का कारण पूछा।

शुभेंदु का भाजपा में शामिल होने का निर्णय अनिश्चित

पार्थ चटर्जी ने कहा, “अगर वह आते तो बेहतर होता।” हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि शुभेंदु ने खुद को पार्टी से अलग कर लिया है। कई मौकों पर वह पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं हुए हैं। बहुत से लोग यह मानने लगे हैं कि शुभेंदु अधिकारी अंततः तृणमूल छोड़कर भाजपा से हाथ मिला लेंगे। हालांकि, शुभेंदु का भाजपा में शामिल होने का निर्णय अनिश्चित है। उनके किसी करीबी ने यह संकेत नहीं दिया कि वह भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।

वर्तमान में शुभेंदु मेदिनीपुर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शुभेंदु अधिकारी का पोस्टर उनके समर्थकों द्वारा उन सभी स्थानों पर लगाया गया है जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे तथा सांसद अभिषेक बनर्जी का पोस्टर देखा गया है। पोस्टर में राज्य के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में शुभेंदु का नाम लिखा गया था। इससे इलाके में खलबली मच गई है।

घटना से अवगत होने पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को हल करने की कोशिश की। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के पिता तथा सांसद शिशिर अधिकारी की पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में पूछा। दरअसल, ममता बनर्जी शुभेंदु अधिकारी को तृणमूल तृणमूल कांग्रेस में बनाए रखना चाहती हैं। लेकिन उनकी इच्छा पूरी होगी या नहीं, 2021 के विधानसभा चुनावों में देखा जाएगा।

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