उद्धव ठाकरे ने दी BJP को खुलेआम चेतावनी, कहा-नामर्द नहीं हूं, हम एक का बदला दस से लेंगे

उन्होंने कहा कि उस रास्ते पर चलने की हमारी इच्छा नहीं है, पर हमें मजबूर मत करो। 

नयी दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी के संपादकीय मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में बीजेपी को खुलेआम चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मैं संयमी हूं, नामर्द नहीं और इस तरह से हमारे परिजनों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए हमला जारी रहा तो हम एक का बदला दस से लेंगे। उन्होंने कहा कि उस रास्ते पर चलने की हमारी इच्छा नहीं है, पर हमें मजबूर मत करो।

Uddhav Thackeray

गौरतलब है कि सुशांत सिंह की मौत के प्रकरण में उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य के मंत्री आदित्य ठाकरे पर निशाना साधा गया था। इसके अलावा, इसी सप्ताह ईडी ने शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक के ठिकानों पर रेड मारी थी। साफ है कि शिवसेना प्रमुख इन घटनाक्रमों को लेकर काफी नाराज हैं। शिवसेना को लगता है कि ये कार्रवाइयां महाराष्ट्र की सरकार को अस्थिर करने के लिए की जा रही हैं।

महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी सरकार की वर्षगांठ पर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ से इंटरव्यू में  उद्धव ठाकरे ने कहा कि ईडी आदि का दुरुपयोग करके दबाव बनाओगे तो यह मत भूलो कि तुम्हारे भी परिवार और बच्चे हैं। उद्धव ने कहा कि हम में संस्कार है, इसलिए संयम बरत रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मैं शांत हूं, संयमी हूं लेकिन नामर्द नहीं हूं। जिस प्रकार से हमारे लोगों के परिजनों पर हमले शुरू हैं, ये तरीका महाराष्ट्र का नहीं है। बिल्कुल नहीं है। यहां एक संस्कृति है। हिंदुत्ववादी मतलब एक संस्कृति है। अगर हम पर हावी होने की कोशिश करने वाले हमारे परिवार या बच्चों पर आना चाहते हैं, तो याद रखें उन लोगों के भी परिवार और बच्चे हैं। और, आप भी धुले चावल नहीं हो। तुम्हारी खिचड़ी वैसे पकानी है, वो हम पका सकते हैं।”

उद्धव ठाकरे ने कहा, “आप सीबीआई का दुरुपयोग करने लगे तब उस पर नकेल लगानी पड़ी। क्या ईडी और सीबीआई पर राज्य का अधिकार नहीं है? हम देते हैं नाम, हमारे पास हैं नाम। माल-मसाला पूरी तरह से तैयार है, लेकिन बदले की भावना रखनी है क्या? फिर जनता हमसे क्या अपेक्षा रखेगी। बदले की भावना से ही काम करना है तो तुम एक बताओ, हम दस बताएंगे।”

मुख्यमंत्री ने सरकार के अन्य घटकों कांग्रेस और एनसीपी से सहयोग के सवाल पर कहा कि सभी का सहयोग मिल रहा है और आराम से एक साल पूरा हो गया तथा मुझे आत्मविश्वास है कि अगले चार साल भी हम जरूर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि आघाड़ी करने के लिए शिवसेना, राष्ट्रवादी और कांग्रेस जब तीनों पार्टियां एक साथ आ रही थीं, तब कुछ लोगों को लग रहा था कि ये तीनों पार्टियां एक साथ आएंगी ही नहीं। भाजपा का नाम लिए बिना उद्धव ने कहा कि कुछ लोगों ने ऐसा कयास लगाया था कि शिवसेना हमारे पीछे दौड़ी चली आएगी, जिन लोगों को ऐसा लगता था उनका अनुमान गलत साबित हुआ।

सरकार को अस्थिर करने का प्रयास नाकाम

उद्धव ने कहा कि इस एक वर्ष में सरकार को अस्थिर करने के प्रयास पूरी तरह नाकाम सिद्ध हुए। उन्होंने कहा, “मुझे जब चुनौती मिलती है तो ज्यादा स्फूर्ति आती है। एक बात कुछ लोग भूल जाते हैं कि चमत्कार इस महाराष्ट्र की मिट्टी में है। तेज है, महाराष्ट्र पर कई संकट आए, विपत्तियां आईं। अच्छे-अच्छे हमलावर आए लेकिन क्या हुआ? महाराष्ट्र ने मरी हुई मां का दूध नहीं पीया हुआ है, बाघ की संतान है। जो कोई भी महाराष्ट्र के आड़े आएगा या फिर दबाने की कोशिश करेगा तो क्या होगा, इसका इतिहास में उदाहरण दर्ज है। भविष्य में देखना होगा तो देखने को मिलेगा और ऐसे संकटों का सामना करते हुए उन्हें खत्म करते हुए महाराष्ट्र आगे बढ़ता रहा है, महाराष्ट्र कभी रुका नहीं, महाराष्ट्र कभी रुकेगा नहीं। इसलिए महाराष्ट्र को चुनौती देनेवालों को मेरा कहना है कि ऐसी चुनौती देकर आप प्रतिशोध चक्र चलानेवाले होंगे तो प्रतिशोध चक्र में उलझने की हमारी इच्छा नहीं है। परंतु आपने इसके लिए मजबूर ही किया तो फिर ठीक है, आपके प्रतिशोध चक्र के जवाब में हमारे पास सुदर्शन चक्र है। हम पीछे लगा सकते हैं।”

मुख्यमंत्री मे कहा, “मेरी हर हरकत पर नजर है। ज्यादा हावी होंगे तो हाथ धोकर पीछे लग जाऊंगा। जिन-जिनको परिवार है…जिन-जिनको बाल-बच्चे हैं…वे आईने में देखें कि आपके भी बाल-बच्चे हैं, परिवार है। ऐसा वक्त कल आप पर भी लाने का वक्त हम पर न लाएं, क्योंकि आप भी दूध के धुले नहीं हो। यदि पीछे लग गए तो…उस विकृत स्तर तक मुझे जाना नहीं है। महाराष्ट्र है, राजनीति करो। ठीक है, आप विचारों से हराओ। विचार समाप्त हो जाते हैं तब विकृति आती है। ये विचार खत्म होने के लक्षण हैं।”

सुशांत सिंह मामले पर क्या बोले उद्धव ठाकरे

सुशांत सिंह राजपूत मामले पर जिस तरह से घमासान हुआ उसे लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं उनकी तरफ करुणा भरी नजर से देखता हूं। क्योंकि जिन्हें लाश पर रखे मक्खन बेचने की जरूरत पड़ती है, वे राजनीति करने के लायक नहीं हैं। दुर्भाग्य से एक युवक की जान चली गई। उस गई हुई जान पर आप राजनीति करते हो? कितने निचले स्तर पर जाते हो? यह विकृति से भी गंदी राजनीति है। जिसे हम मर्द कहते हैं, वो मर्द की तरह लड़ता है। दुर्भाग्य से एक जान चली गई, उस पर अलाव जलाकर आप अपनी रोटियां सेंकते हो? यह आपकी औकात है?

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