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UP: कुशीनगर में इस खतरनाक बीमारी का खतरा बढ़ा, बचाव में लगी नौ टीमें

कुशीनगर के 48 गांवों में कालाजार के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है।। छह महीने के भीतर नौ मामले सामने आने से इस तथ्य की पुष्टि हुई है। जुलाई माह में प्रकोप बढ़ने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों की करीब एक लाख की आबादी को बचाने के लिए मुहिम छेड़ दी है। सात विकास खंडों में स्थित इन सभी गाँवों में नौ टीमें बनाकर दवाओं का छिड़काव, जागरूकता के उपायों पर कार्य शुरू कर दिया गया है।
जिले के तरयासुजान विकास खण्ड के 23 गांव, तमकूही के 5, दुदही के 6, कसया व विशुनपुरा के 2-2, कुबेरस्थान के 9 तथा फाजिलनगर के एक गांव कालाजार से प्रभावित है। प्रभावित गांवों में कालाजार के वाहक बालू मक्खी से बचाव के लिए दवा का छिड़काव पिछले माह से ही कराया जा रहा है।
छिड़काव अभियान में लगे जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय ने बताया कि चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य लगातार जारी है। वेक्टर जनित रोग नियंत्रण हेतु अल्फ़ा साईपर मेथरीन 5 प्रतिशत दवा का छिड़काव कराया जा रहा  है।
कालाजार के लक्षण
-मरीज पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर न होना।
-मरीज को भूख न लगना।
-मरीज का लीवर व तिल्ली बढ़ जाना।
-मरीज के शरीर में खून की कमी होना।
-मरीज का वजन कम हो जाना।
-त्वचा का रंग काला हो जाना।
छिड़काव में लगी नौ टीमें
जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय ने बताया कि कालाजार दवा छिड़काव के लिए नौ टीम बनी हैं, जिनमें 54 कर्मी लगाए गए हैं। अभियान में संबंधित क्षेत्र की आशा एवं एएनएम का भी सहयोग लिया जा रहा। उन्होंने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए घरों, शौचालयों तथा गोशाला में भी छिड़काव कराया जा रहा है। छिड़काव करीब 6 फीट की ऊंचाई तक कराया जा रहा है। कच्चे घरों, अंधेरे व नमी वाले स्थानों पर विशेष तौर पर छिड़काव कराया जा रहा है। इस कार्य में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल को-आर्डिनेटर डाँ सागर घोडेकर का विशेष सहयोग मिल रहा है। इनके द्वारा निरंतर छिड़काव कार्य का जायजा भी लिया जा रहा है।
क्या है कालाजार
कालाजार रोग जन स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या है। यह रोग एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य तक मादा बालू मक्खी के काटने से फैलता है। बालू मक्खी प्रायः घरों के सीलन युक्त अंधेरे स्थानों, दीवारों की दरारों, छेदों, गोबर की ढेरों में पाई जाती हैं। विशेष कर गोबर की ढेरों में अंडे देती है। जो समयानुसार बढ़ कर बालू मक्खी बन जाते हैं। बालू मक्खी का भोजन रक्त होता है। यह रोग समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में ज्यादा है। कुशीनगर नगर में मुसहर समुदाय के लोग इस रोग की चपेट में अपेक्षाकृत ज्यादा पाया जाता है।
कुशीनगर में कालाजार की बर्षवार स्थिति
वर्ष 2015 मे 108, वर्ष 2016 में 78, वर्ष 2017 में 61, वर्ष 2018 में 47, वर्ष 2019 में 32, वर्ष 2020 में 9 मरीज (जून माह तक)।
टीके की भी है व्यवस्था 
जिला अस्पताल में रैपिड डायग्नोस्टिक किट (आरके-39) उपलब्ध है। इसके जरिए खून का नमूना लेकर कुछ देर में ही रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती है। बीमारी से निजात का टीका भी लगता है। सरकार की तरफ से इसे निशुल्क लगाया जाता है।

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