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Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बुधवार को लंबी फोन बातचीत हुई। इस चर्चा में दोनों देशों ने ईरान, ताइवान और व्यापारिक संबंधों सहित कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार किया। ट्रंप ने शी के साथ अपने अच्छे संबंधों का जिक्र किया और अप्रैल में बीजिंग यात्रा करने की योजना का संकेत दिया। चीन ने इस यात्रा की पुष्टि नहीं की, केवल आगामी शिखर सम्मेलनों की बात कही।

ईरान मुद्दा

बातचीत में मुख्य रूप से ईरान पर ध्यान केंद्रित किया गया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि चीन और अन्य देश ईरान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को सीमित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई देश ईरान के साथ व्यापार करता है तो उसके सामान पर अमेरिका 25 प्रतिशत टैक्स लगाएगा। इस बीच, ईरान 2024 में 125 बिलियन डॉलर का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कर चुका है, जिसमें चीन 32 बिलियन डॉलर, यूएई 28 बिलियन डॉलर, और तुर्की 17 बिलियन डॉलर के साथ शामिल हैं।

ताइवान मुद्दा

दोनों नेताओं ने ताइवान के मुद्दे पर भी चर्चा की। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे मिलाने की मांग करता है। वहीं अमेरिका ने ताइवान को 10 बिलियन डॉलर के हथियार, मिसाइल और ड्रोन सप्लाई करने की योजना बनाई है, जिससे चीन नाराज है। चीन ने अमेरिका को समझदारी से काम करने की चेतावनी दी।

परमाणु हथियार और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा

इस बातचीत के समय अमेरिका और रूस के बीच New START Treaty समाप्त हो रही थी। ट्रंप ने संकेत दिया कि वह भविष्य में परमाणु हथियारों पर सीमाएं रखना चाहते हैं और संभवत: चीन को भी नई संधि में शामिल करना चाहेंगे।

वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन

वहीं वाशिंगटन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चीन पर निर्भरता कम करने और खनिजों की नई सप्लाई चेन बनाने पर चर्चा की। ट्रंप की नीतियों के कारण दुनिया भर में व्यापार के तरीके बदल रहे हैं, और वियतनाम, यूरोपीय संघ, भारत और कनाडा जैसे देश नए व्यापारिक समझौते कर रहे हैं ताकि आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।