उत्तर प्रदेश : अयोध्या केंद्रित हुई राजनीति, सभी राजनीतिक दलों के एजेंडे में राम

सबमें रमै रमावै जोई, ताकर नाम राम अस होई।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ‘राममय’ है। राम और अयोध्या सभी राजनीतिक दलों के एजेंडे में है। जैसे सबरी के राम, केवट के राम भक्त हनुमान के राम हैं उसी तरह सभी दलों के राम हैं। राम सबमें समाये हुए हैं।

संत कवि कबीर दास कहते हैं कि ‘सबमें रमै रमावै जोई, ताकर नाम राम अस होई’ अर्थात जो हर किसी में बसता है और सभी को अपने में समाहित कर लेता है वही राम है। यूपी विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदेश में कुछ ऐसा ही संयोग व स्थितियां बनी हैं।

अयोध्या

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में कुछ ही महीनो बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले भगवान राम राजनीति में नई संभावनाओं के प्रतीक बन चुके हैं। राम सभी राजनीतिक दलों के एजेंडे में हैं। और तो आउट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने अपना ‘रंग’ बदलते हुए रामायण का रुख किया है। केरल में पार्टी की मलप्पुरम जिला कमिटी ने रामायण पर ऑनलाइन संवाद की सीरीज शुरू की है।

देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पूरी राजनीति ही अयोध्या पर केंद्रित हो चुकी है। सत्तारूढ़ बीजेपी की राजनीति की बुनियाद ही राम और अयोध्या है। गत वर्ष पांच अगस्त को बतौर यजमान प्रधानमंत्री राम मंदिर का भूमि पूजन किया। इसी तरह सीएम योगी अपने कार्यकाल के साढ़े चार साल में 20 से ज्यादा बार अयोध्या में शीश नवा चुके हैं।

इसी तरह राम नगरी में विगत चार वर्षों से भव्य दीपोत्सव हो रहा है। पीएम मोदी स्वयं अयोध्या से जुड़े विकास कार्यों पर निगाह रखे हुए हैं।

सीएम योगी का भी लक्ष्य अयोध्या को विश्व में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी के तौर पर प्रख्यात करना है। इस बार भी बीजेपी राम और राम राज्य के नाम पर ही प्रदेश वासियों से समर्थन मांगेगी।

यह राम की ही महिमा है कि राम और उनकी अयोध्या बहुजन समाज पार्टी को भी भाने लगी है। बीएसपी ने अपने ब्राह्मण सम्मेलन (प्रबुद्ध गोष्ठी) की शुरुआत अयोध्या से ही की।

रामलला के दर्शन के बाद बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि हम तो ब्राह्मण हैं और रोज राम की पूजा करते हैं। इसी तरह राम और अयोध्या को लेकर समाजवादी पार्टी की धारणा भी बदल;चुकी है। जानकारी के मुताबिक़ सपा यादव भी अयोध्या जाने वाले हैं।

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस कबीर दास के मार्ग पर चल रही है। कबीर दास पहले ही कह चुके हैं, ‘सबमें रमै रमावै जोई, ताकर नाम राम अस होई’ अर्थात जो सबमें बसता है और सभी को अपने में समाहित कर लेता है वही राम है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी गत वर्ष राम मंदिर भूमि पूजन के समय कहा था कि ‘राम सबके हैं और सब राम के हैं’।

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