देवभूमि हरिद्वार में नशे के सौदागरों पर कसेगा शिकंजा, DM मयूर दीक्षित का महा-एक्शन प्लान तैयार
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में नशे के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। तीर्थनगरी की पहचान और युवाओं के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन अब नशे की अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत तस्करी करने वालों पर कार्रवाई के साथ नशा छोड़ने वालों के लिए पुनर्वास व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मार्गदर्शन में इस अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने की योजना तैयार की गई है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हरिद्वार में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जाए और लोगों को इसके खिलाफ जागरूक किया जाए।
विभागों के बीच बेहतर तालमेल से चलेगा अभियान
नशे के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को नार्को-कोऑर्डिनेशन समिति (एनसीओआरडी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता ने की। इसमें पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों ने अब तक की कार्रवाई की समीक्षा की।
अधिकारियों ने तय किया कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए तस्करों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
2026 में नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 में एनडीपीएस एक्ट के तहत कई महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई हैं। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमों ने स्मैक, चरस, गांजा और प्रतिबंधित दवाओं सहित कई नशीले पदार्थ बरामद किए हैं।
प्रशासन के अनुसार अवैध बिक्री और सप्लाई करने वाले लोगों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य नशे के पूरे नेटवर्क को कमजोर करना और युवाओं तक नशीले पदार्थों की पहुंच रोकना है।