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नेपाल के PM बालेन शाह के 'कब्जे' वाले बयान पर भारत का दोटूक जवाब, भड़के नेपाली नागरिकों के प्रदर्शन के बाद बॉर्डर पर महा-अलर्ट

भारत के साथ सदियों पुराने रोटी-बेटी के रिश्तों वाले पड़ोसी देश नेपाल की सियासत में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा भारत की जमीन पर कब्जे को लेकर दिए गए एक बेहद विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयान के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में गरमाहट बढ़ गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस बयान के बाद न सिर्फ भारत में बल्कि खुद नेपाल के भीतर भी पीएम बालेन शाह की चौतरफा फजीहत और खिलाफत शुरू हो गई है। उत्तराखंड से सटे नेपाल के कई सीमावर्ती इलाकों में बालेन शाह के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बदलते और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए हाई-अलर्ट घोषित कर दिया है।

खुली सीमाओं और पगडंडियों पर एसएसबी का कड़ा पहरा, स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त गश्त तेज

नेपाल में जारी अंदरूनी विरोध प्रदर्शनों और सीमा पर पैदा हुई संवेदनशीलता को देखते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) और उत्तराखंड स्थानीय पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। पिथौरागढ़ और बलुवाकोट जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से सघन गश्त अभियान (पेट्रोलिंग) तेज कर दिया है। एसएसबी के जवान भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर होने वाली किसी भी संभावित घुसपैठ, हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए मुस्तैद हैं। सुरक्षा बल विशेष रूप से उन दुर्गम पहाड़ी रास्तों, पगडंडियों और चेकपोस्टों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं जहां से आम नागरिकों का आवागमन सबसे ज्यादा होता है। बलुवाकोट क्षेत्र में थानाध्यक्ष नीमा बोहरा के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी की टीम ने सीमावर्ती गांवों का दौरा किया और स्थानीय ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखते ही तुरंत सुरक्षा बलों को सूचित करें।

डडेलधुरा में बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरे नेपाली युवा, अपने ही देश में घिरे पीएम

नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस बेतुके बयान ने खुद नेपाल के भीतर एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। उत्तराखंड की सीमा से बिल्कुल सटे नेपाल के डडेलधुरा समेत कई प्रमुख जिलों और शहरों में विभिन्न छात्र संगठनों, युवा विंग्स और आम नागरिकों ने बालेन शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेपाल की सड़कों पर बालेन शाह विरोधी नारे गूंज रहे हैं और लोग अपनी ही सरकार की इस बचकानी विदेश नीति की तीखी आलोचना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि भारत जैसे भरोसेमंद और बड़े मददगार पड़ोसी देश के साथ इस तरह का मनगढ़ंत सीमा विवाद पैदा करना नेपाल के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। अपनी ही जनता के बीच बुरी तरह घिरे नेपाली पीएम को अब जवाब देते नहीं बन रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय का सधा हुआ और कड़ा रुख, कहा— गंडक नदी के कारण बदली स्थिति

इस पूरे संवेदनशील मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद सधा हुआ लेकिन अत्यंत कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत सरकार ने नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों और उसके बाद नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए स्पष्टीकरण को बारीकी से देखा है। उन्होंने पूरी दुनिया को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए साफ किया कि भारत और नेपाल के बीच लगभग 98 फीसदी अंतरराष्ट्रीय सीमा पूरी तरह से निर्धारित और स्वीकृत हो चुकी है। बचे हुए कुछ हिस्सों में जो भी मतभेद हैं, वे मुख्य रूप से गंडक नदी के प्राकृतिक बहाव में समय-समय पर आए बदलावों के कारण उत्पन्न हुए हैं।

सीमा विवाद पर तीसरे पक्ष की एंट्री बर्दाश्त नहीं, द्विपक्षीय तंत्र से ही निकलेगा समाधान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया है कि भारत और नेपाल के बीच सीमा संबंधी किसी भी मुद्दे या नो-मैन्स लैंड पर हुए अतिक्रमण के मामलों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के पास पहले से ही एक मजबूत, स्थापित और विश्वसनीय द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है। इस तंत्र के जरिए दोनों देश संयुक्त रूप से मानचित्रण (मैपिंग) का काम कर रहे हैं और आपसी बातचीत से ही इसका समाधान निकाला जाएगा। इसके साथ ही भारत ने किसी भी अन्य देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया कि भारत और नेपाल के इस विशुद्ध द्विपक्षीय मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है और न ही इसे बर्दाश्त किया जाएगा।

कश्मीर पर पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान को भारत ने सिरे से किया खारिज

प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय ने न केवल नेपाल मामले पर बल्कि पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक संयुक्त बयान पर भी बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी। दरअसल, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के उस संयुक्त प्रेस बयान में भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर का अनावश्यक रूप से उल्लेख किया गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि हम भारत के आंतरिक और संप्रभु मामलों पर किसी भी बाहरी मंच या देश द्वारा किए गए ऐसे बेवजह और दुर्भावनापूर्ण जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं। जम्मू-कश्मी

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