जीवन कष्टमय कर देता है काल सर्प दोष, जानिए कितनी तरह के हैं कालसर्प योग और उपाय

जयोतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में काल सर्प दोष हो तो यह जातक के भविष्य के लिए और  जीवन दोनो के लिए घातक सिद्ध हो सकती है या फिर परेशानी का सबब बन सकती है। हिंदू धर्म मे किसी भी व्यक्ति की कुंडली को व्यक्ति के जीवन मे महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। और यह कुंडली ग्रहो और नक्षत्रो के गणना को आधार बनाकर की जाती है। astrology के हिसाब से जिस भी जातक की कुंडली मे कालसर्प दोष विधमान है उसे विवाह, सम्मान, संतान,बिजनेस, पैसा, आदि जैसी संबधी कई तरह की समस्याओं की आशंका बनी रहती है।

काल सर्प दोष

क्या है विभिन्न काल, कौन है शुभ और कौन अशुभ? और किसी भी रत्न को धारण करते समय इन 10 नियमों का रखें ध्यान

क्या होता है यह काल सर्प योग

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु की चाल सदा वक्री होती है इस सदा वक्री चाल को उल्टी चाल भी कहा जाता हैं और अन्य सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में इस सदा वक्री चाल मे आ जाते हैं तो व्यक्ति कालसर्प  दोष से ग्रस्ति माना जाता है।

काल सर्प योग 12 प्रकार के होते है।यह हर राशि पर अपना अलग अलग प्रभाव छोड़ते है।

1•अनंत कालसर्प दोष

जब जातक की कुंडली में राहु लग्न भाव में और केतु सप्तम भाव में  होता है तथा अन्य सभी ग्रह सप्तम भाव से लेकर द्वादश, एकादशी, दशम, नवम, अष्टम भाव में जब स्थित होते है तो यह अनंत कालसर्प योग कहलाता है। इसके अंतर्गत आने वाले जातकों के व्यक्तित्व निर्माण में कठिन मेहनत की जरूरत पड़ती है।

2•कुलिक कालसर्प दोष

जब राहु द्वितीय भाव में और केतु अष्टम भाव में होता है और अनय सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में होते है तो यह कुलिक कालसर्प दोष होता है। इस मे जातक को समाजिक हानि उठानी पढ सकती है।

3•शेषनाग कालसर्प दोष

जब राहु द्वादश स्थान में और  केतु छठे स्थान में होता है और अन्य सभी ग्रह चतुर्थ तृतीय और प्रथम स्थान में सिथत हो तो शेषनाग कालसर्प दोष कहलाता है। इस मे  जातक की मनोकामना व इच्छा हमेशा देरी से ही पूरी होती हैं। इस तरह के जातकों को आर्थिक तंगी लगी रहती है।

4•विषधर कालसर्प दोष

केतु पंचम भाव मे और जब राहु ग्यारहवे भाव में सिथत हो तो विषधर कालसर्प योग बनता हैं। इस दोष के वजह से जातक को धन की हानि होने की आशंका बनी रहती है।साथ ही साथ परिवार से भी संबंध खराब होने की संभावना बढ जाती है।

5•वासुकी कालसर्प दोष

जब राहु तृतीय भाव में और केतु नवम भाव में स्थित होता है तो यह योग वासुकी कालसर्प दोष कहलाता है। इस तरह के योग मे जातक के भाई-बहनों से रिशते खराब होने की संभावना बनी रहती है। या फिर जातक मानसिक रूप से बीमार या फिर परेशान रहता है।

6•शंखपाल कालसर्प दोष

राहु चतुर्थ भाव में और केतु दशम भाव में होता है तो वह शंखपाल कालसर्प दोष कहलाता है। इस योग मे जातक को घर- संपत्ति से संबंधित कठिनाइयां का सामना कर पड़ सकता है।

7•पद्य कालसर्प दोष

जब राहु पंचम भाव में और केतु एकादश भाव में सिथत हो साथ ही साथ में एकादशी पंचांग आठवें भाव में स्थित हो तो यह योग पद्म कालसर्प योग कहलाता है। इस योग मे जातक को विलंब से संतान प्राप्ति की संभावना होती है,

8•महापद्म कालसर्प दोष

राहु छठे भाव में तथा केतु बारहवे भाव में स्थित हो और अन्य सभी ग्रह अवस्थित हों तो महापद्म कालसर्प योग बनता है। इस योग में जातक के शत्रु को विजय प्राप्त होती है। धन लाभ बहुत होता है लेकिन धन का सुख प्राप्त नही होता है।

9•तक्षक कालसर्प दोष

कुंडली के मुताबिक जब राहु सप्तम भाव में और केतु लग्न भाव में स्थित होता है तो इस दशा को तक्षक कालसर्प दोष कहते हैं । इस योग से पीड़ित जातक का प्रेम कभी सफल नही हो पाता है और जातक को स्वास्थ्य संबंधित परेशानियो का सामना करना पडता है।

10•कर्कोटक कालसर्प दोष

कुंडली मे केतु दूसरे भाव में और राहु जब अष्टम भाव में हो तो यह कर्कोटक कालसर्प दोष बनाता है। इस योग से पीड़ित जातक के भाग्योदय में रुकावटें बहुत आती हैं।

11• शंखचूड़ कालसर्प दोष

कुंडली मे जब केतु तीसरे भाव में और राहु नवम भाव में स्थित होता है तो शंखचूड़ कालसर्प दोष बनता है। इसमे जातक ईओ स्वास्थ्य संबंधित और समाजिक हानि बहुत उठानी पडती है साथ ही साथ वयकति को व्यावसायिक प्रगति और नौकरी में प्रोन्नतियोग मे भी अडचन आती है।इस योग से पीड़ित जातक का भाग्योदय बहुत ही देरी से होता है।

12• घातक कालसर्प दोष

राहु दशम भाव में स्थित हो और केतु चतुर्थ भाव में स्थित होता है तो यह योग मिलकर घातक कालसर्प योग बनाते है। इस योग में जातक को कभी भी संतुष्टि नही होती है वह हर चीज ज्यादा ही चाहता है चाहे वह समाजिक मान सम्मान हो या फिर धन

आइए देखते है कुछ ज्योतिषीय उपाय जिनको अपना कर काल सर्प दोष से राहत व निजात मिल सकती हैं।

  • काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को भगवान शिव की रोजाना पूजा करनी चाहिए यदि संभव हो सके तो नागपंचमी के दिन धातु का बना हुआ नाग नागिन का जोड़ा मंदिर में अवशय चढ़ाएं।
  • इस योग से पीड़ित व्यक्ति को अपनी अनामिका अंगुली में सोना, चांदी और तांबा से मिलाकर बनी धातु से सांप के आकार की बनी हुई अंगूठी शनिवार के दिन को धारण करें।
  • संभव हो सके तो घर के दरवाजे के चौखट पर चांदी का स्वास्तिक अवशय लगाएं।
  • यदि जातक के दाम्पत्य जीवन में बहुत क्लेश हो रहा हो तो शनिवार के दिन को दोबारा सात फेरे लगाकर विवाह करें।
  • घर के मंदिर में मोरपंख को रखें। और रोजाना ओम नमो वासुदेवाय मंत्र का जाप अवशय करें।
  • चंदन लेकर एकाक्षी नारियल का पूजन कर के 7 बार अपने सर पर से घुमा करके किसी नदी व तालाब मे प्रवाहित कर दें।
  • यदि जातक को यह दोष है तो उसे नव नाग स्तोत्र का जाप व पाठ अवशय करना चाहिए।
  • राहू यंत्र की पूजा प्रतिदिन करें।
  • नाग पंचमी के दिन पर वट वृक्ष की 108 प्रदक्षिणा अवशय करें।

जीवनसाथी चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान, खुशी से बीतेगा दांपत्य जीवन