‘बाबा’ का चला चाबुक तो ‘भाई’ को ‘जान’ बताने से कतराने लगे लोग

बुलंदी देर तक किस शख़्स के हिस्से में रहती है, बहुत ऊंची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है'। प्रख्यात शायर मुनव्वर राणा के शेर की यह पंक्तियां बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर सटीक बैठती है। 

गाजीपुर। ‘बुलंदी देर तक किस शख़्स के हिस्से में रहती है, बहुत ऊंची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है’। प्रख्यात शायर मुनव्वर राणा के शेर की यह पंक्तियां बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर सटीक बैठती है।
yogi don and mukhtar
 पूर्वांचल में ‘भाईजान’ के नाम से विख्यात मुख्तार अंसारी तथा उनके परिजनों की नजदीकियों से इतराने वाले कुछ खास लोग भी अब दूरी बनाने लगे हैं। शासन-प्रशासन द्वारा लगातार चल रहे कानूनी कार्रवाई के बाद अपनी पहचान मिटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि लगातार ‘भाईजान-भाईजान’ का रट लगाने वाले लोग अब ‘भाई’ को ‘जान’ मानने से कतराने लगे हैं।

गलबहियां व परिजनों से आशीर्वाद वाली फोटो व पोस्ट डिलीट करने लगे करीबी 

फेसबुक सहित तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, बसपा सांसद व उनके बड़े भाई अफजाल अंसारी, बसपा नेता विधानसभा चुनाव लड़ चुके उनके पुत्र अब्बास अंसारी के साथ गलबहियां व समर्थन की फोटो वाली पोस्ट लगाकर अंसारी परिवार का खास बनने वाले लोग अपने पोस्ट डिलीट करते नजर आने लगे हैं। अब तीज, त्यौहार, प्रमुख पर्व पर शहर में लगने वाले होर्डिंग पोस्टर से फोटो भी नदारद हो गए हैं।
 पिछले 25 वर्षों में मुख्तार अंसारी की राजनीति में जिस कद से हैसियत बढ़ी, उससे अधिक गति से उन्हें चाहने वालों की संख्या भी बढ़ी। स्थिति यह हो गई लोग ‘मुख्तार’ नाम से कम ‘भाईजान’ के नाम से अधिक विख्यात हो गए।
 गाजीपुर के साथ ही मऊ, आजमगढ़, बलिया, वाराणसी, चंदौली, अंबेडकरनगर, फैजाबाद में अंसारी परिवार ने महज अपनी राजनीतिक हैसियत से नहीं बल्कि आर्थिक साम्राज्य को भी मजबूती के साथ खड़ा किया। आलम यह रहा कि इन विभिन्न जनपदों में जमीनी आधिपत्य के साथ ही ठेकेदारी, मोबाइल टावर में डीजल सप्लाई,सरकारी खाद्यान्न गोदामों में राशन ढुलाई तक में मुख्तार अंसारी का वर्चस्व स्थापित हो गया।

‘भाईजान’ से नजदीकी वाले फोटो पोस्ट वायरल कर अपने संबंध का रिचार्ज भी कराते रहे

 रेलवे रैक पॉइंट से खाद्य भंडारण गोदाम व गोदाम से कोटेदारों के दरवाजे तक पहुंचाने की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था भाईजान के नाम। खाद्य अनाज भंडारण गोदाम की पूरी व्यवस्था भाईजान के नाम। पीडब्ल्यूडी से लेकर सभी बड़े ठेके भाईजान के नाम। मोटी कमाई का जरिया माना जाने वाला मोबाइल टावरों में डीजल सप्लाई का काम भाईजान के नाम। ऐसे में सभी जगहों पर उनके समर्थकों व सिपहसालारों की चांदी कटने लगी। क्योंकि सभी कामों को अंसारी परिवार द्वारा अपने लोगों के बीच बांट दिया गया था। ऐसे में उन लोगों द्वारा समय-समय पर होर्डिंग पोस्टर के साथ ही सोशल मीडिया इत्यादि पर ‘भाईजान’ से नजदीकी वाले फोटो पोस्ट वायरल कर समय-समय पर अपने संबंध का रिचार्ज भी कराते रहे।
 उल्लेखनीय है कि भाजपा के सत्ता में आने से पूर्व मुख्तार अंसारी का नाम ही सबकुछ था। सरकारी से लेकर प्राइवेट कार्यालयों तक उनके नाम से काम हो जाने की पूरी गारंटी थी। खासकर गाजीपुर जिला जेल में ‘भाईजान’ के लिए मछली पालन, धान की खेती, उत्तर प्रदेश की स्थानीय राजनीति में मजबूत हैसियत बन चुकी सपा-बसपा में शीर्ष स्तर पर मजबूत पकड़ इत्यादि के उदाहरण दिए जाते रहे। लेकिन मार्च 2017 में भाजपा की सरकार व योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाई पर कानून का डंडा चलना शुरू हो गया। जिसके बाद स्थिति यह हो गई की भाईजान-भाईजान की रट लगाने वाले ‘भाई’ से ‘जान’ छुड़ाते नजर आने लगे हैं।

‘रूबरू होने की तो छोड़िये, लोग गूफ्तगू से भी कतराने लगे हैं’

 गौरतलब हो कि कानूनी कार्रवाई के जद में अंसारी परिवार के साथ ही उनके सिपहसालार व नज़दीकियों पर भी बुलडोजर चले। इसके साथ ही संपत्ति जब्तीकरण का काम भी किया गया। इसको देखकर उनसे नजदीकी बताकर अपना काम साधने वाले लोग सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म से गायब होने के साथ ही गाहे-बगाहे तीज त्यौहार व प्रमुख पर्व पर नगर शहरों में लगाए जाने वाले होर्डिंग पोस्टर से फोटो भी गायब कर लिए हैं। ऐसे में लोगों को किसी शायर के यह पंक्तियां याद आने लगी। ‘रूबरू होने की तो छोड़िये, लोग गूफ्तगू से भी कतराने लगे हैं।’

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *