इस्लामिक नाटो में शामिल हो सकता है मिस्र, हुए खतरनाक रक्षा समझौते से दहल उठी दुनिया

इस्लामिक नाटो में शामिल हो सकता है मिस्र, हुए खतरनाक रक्षा समझौते से दहल उठी दुनिया

पश्चिम एशिया और वैश्विक भू-राजनीति में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक नए और शक्तिशाली त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन का गठन किया है, जिसे बिल्कुल 'नाटो' (NATO) की तर्ज पर तैयार किया गया है।

इस रणनीतिक समझौते के तहत यह नियम बनाया गया है कि यदि इन तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर बाहरी हमला होता है, तो उसे तीनों देशों के खिलाफ सीधी आक्रामकता माना जाएगा। इस महा-गठबंधन के सामने आने से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है और दुनिया भर के रणनीतिकार इसके दूरगामी परिणामों का आकलन करने में जुट गए हैं।

मिस्र भी हो सकता है शामिल, तुर्की के विदेश मंत्री का बड़ा खुलासा

यह त्रिपक्षीय सैन्य गठबंधन फिलहाल शुरुआती दौर में केवल तीन देशों (सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान) तक ही सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसके दायरे का व्यापक विस्तार होने की पूरी संभावना है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तहत मिस्र भी इस शक्तिशाली गठबंधन का हिस्सा बन सकता है।

फिदान के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से अधिक समय तक चली लंबी और व्यापक कूटनीतिक चर्चाओं के बाद इस गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय के साथ इसका विस्तार किया जाएगा और क्षेत्र के कई अन्य देश भी इसमें शामिल होने की गहरी इच्छा जता रहे हैं, हालांकि फिलहाल उन्होंने आधिकारिक तौर पर केवल मिस्र का ही नाम लिया है।

ईरान को लेकर क्या है इस नए गठबंधन का रुख

चूंकि इस सैन्य संधि में पश्चिम एशिया के सबसे प्रभावशाली देश शामिल हैं, इसलिए दुनिया भर के विशेषज्ञों का ध्यान इस बात पर है कि क्या यह ईरान के खिलाफ कोई घेराबंदी है। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने जोर देकर कहा है कि इस गठबंधन का निर्माण किसी भी स्थिति में ईरान को लक्षित करके नहीं किया गया है और इसका मूल स्वरूप पूरी तरह से 'रक्षात्मक' (Defensive) है।

'तुर्किये टुडे' के हवाले से फिदान ने शनिवार को बयान दिया, "जब हम इन देशों के साथ एकजुट होते हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से एक रक्षा संगठन बन जाता है। जब तक इस पर क्षेत्र के भीतर या बाहर से हमला नहीं होता, यह गठबंधन कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा। मैं यह बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं कि ईरान इस गठबंधन का निशाना नहीं है। कोई भी ऐसा देश जो हम पर हमला नहीं करता, वह हमारा निशाना नहीं है।"