नेपाल के PM बालेन शाह ने भारत को कहा शुक्रिया; फिर सारी दुनिया को दे दी खतरनाक वॉर्निंग
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है. उन्होंने कहा कि नेपाल को जलवायु परिवर्तन की वजह से सामने आ रही आपदाओं की गंभीरता को दुनिया के सामने मजबूती से रखना होगा. पिछले सप्ताह आई अचानक बाढ़ के आठ दिन बाद अब तक 1114 लाशें बरामद की जा चुकी हैं, जबकि करीब 3900 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं.
नेपाल की प्रतिनिधि सभा (निचला सदन) को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का असर अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है. यह लोगों की जान, बुनियादी ढांचे और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है. शाह ने कहा कि इस आपदा ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. आखिर यह आपदा इतनी भयानक कैसे हुई और नेपाल को भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए किस तरह तैयार होना होगा?
सारी दुनिया से क्या बोले बालेन शाह?
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के असर से अचानक आई इस बड़ी मुसीबत ने सरकार को चौबीसों घंटे नुकसान कम करने के काम में जुटा दिया है. साथ ही यह सवाल भी सामने आया है कि आखिर ऐसी आपदा की स्थिति बनी कैसे. प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते खतरों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जागरूक करना जरूरी है. उनके मुताबिक, जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया की साझा चुनौती है और इसके प्रभावों को कम करने की जिम्मेदारी भी सभी देशों की है.
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय पर चेतावनी नहीं पहुंचने को लेकर उठे सवालों पर शाह ने कहा कि जैसे ही सरकार को बाढ़ की जानकारी मिली, सुरक्षा कर्मियों को लोगों को सतर्क करने के लिए भेजा गया था. हालांकि, चेतावनी देने के अभियान के दौरान कुछ सुरक्षाकर्मी खुद लापता हो गए.
अंतरराष्ट्रीय मदद पर क्या बोले बालेन?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नेपाल सरकार राहत और बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से हिचक रही थी. शाह ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि बड़े पैमाने की आपदा के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहायता को ठुकराना सरकार की नीति नहीं रही है. उन्होंने बताया कि आपदा के शुरुआती दौर से ही प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत के मुताबिक कई देशों के साथ मदद के लिए संपर्क किया जा रहा था. भारत और चीन ने भी टेक्निकल एक्सपर्ट्स भेजे, जिन्होंने पहले दिन से प्रभावित इलाकों का हवाई और तकनीकी आकलन शुरू कर दिया था.
भारत और चीन ने अपने एक्सपर्ट्स भेजे- शाह
शाह ने कहा कि भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा होने की वजह से शुरुआती दिनों में विदेशी बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल था. भारतीय और चीनी एक्सपर्ट्स ने नेपाल की टेक्निकल टीम और सेना के साथ मिलकर हालात का जायजा का लिया. हालात कुछ बेहतर होने के बाद ही बड़े स्तर पर राहत और बचाव मुहिम शुरू हो सका. उन्होंने बताया कि शुरुआत में खुदाई करने वाली मशीनों को घटनास्थल तक ले जाने के लिए स्थिर जमीन नहीं थी. सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के लिए भी सुरक्षित जमीन उपलब्ध नहीं थी. बचावकर्मियों ने जहां तक मुमकिन हुआ, रेंगकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश की. जब मशीनों के लिए स्थिर जमीन और हेलीकॉप्टरों के उतरने की जगह उपलब्ध हुई, तभी बचाव अभियान को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जा सका.
भारत समेत सभी पड़ोसियों को कहा शुक्रिया
प्रधानमंत्री ने राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए भारत और चीन समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का शुक्रिया भी अदा किया. उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, यूएई, कतर, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश का भी जिक्र किया. इसके अलावा एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी मदद की है. शाह ने कहा कि कई अन्य मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी आगे सहायता देने का भरोसा दिया है.