सिंगापुर सरकार का कड़ा रुख, घटिया हरकतों पर पुलिस जांच शुरू और सोशल मीडिया पर शिकंजा
पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और मानवीय त्रासदी के बीच सोशल मीडिया पर मानवता को शर्मसार करने वाली कुछ ऐसी घिनौनी हरकतें सामने आईं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया नेपाल के इस मुश्किल वक्त में उसके साथ खड़ी होकर मदद के हाथ बढ़ा रही थी, वहीं कुछ असामाजिक तत्व और कट्टरपंथी विचारधारा के लोग इस आपदा की आड़ में भारत के खिलाफ नफरत फैलाने और जहर उगलने में लगे हुए थे। इस शर्मनाक और घटिया रवैये का संज्ञान लेते हुए सिंगापुर की सरकार और वहां के कानून प्रवर्तन तंत्र ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सिंगापुर पुलिस ने नेपाल त्रासदी का इस्तेमाल करके सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ट्रोल्स और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के खिलाफ औपचारिक आपराधिक जांच शुरू कर दी है। सिंगापुर जैसे कड़े कानूनों वाले देश में इस तरह की नफरती गतिविधियों पर प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सोशल मीडिया की आड़ में किसी भी देश या समुदाय के खिलाफ जहर उगलने की छूट समझते हैं।
नेपाल की प्राकृतिक आपदा और सोशल मीडिया पर फैलाया गया जहर
नेपाल में हुई भारी तबाही ने लाखों बेकसूर लोगों की जिंदगियों को अस्त-व्यस्त कर दिया है और इस संकट की घड़ी में भारत ने हमेशा की तरह सबसे पहले आगे बढ़कर पड़ोसी धर्म निभाते हुए राहत सामग्री, दवाइयां और बचाव दल भेजे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि कुछ विघटनकारी तत्व और भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने वाले लोग इस मानवीय सहायता और आपदा को भी अपनी ओछी राजनीति और नफरत का अखाड़ा बनाने से बाज नहीं आए। सिंगापुर में बैठे कुछ विदेशी नागरिकों और इंटरनेट यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नेपाल की इस त्रासदी को आधार बनाकर भारत के खिलाफ आपत्तिजनक, झूठी और बेहद भड़काऊ पोस्ट साझा करनी शुरू कर दीं। इन पोस्ट्स का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी भाईचारे को ठेस पहुंचाना और इंटरनेट पर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देना था। इस तरह की घटिया हरकतों ने न केवल प्रवासी भारतीयों बल्कि सिंगापुर के स्थानीय नागरिकों और जिम्मेदार वर्ग को भी झकझोर कर रख दिया, जिसके बाद प्रशासन के पास शिकायतें दर्ज कराई गईं।
सिंगापुर पुलिस का कड़ा एक्शन और आपराधिक जांच की शुरुआत
सिंगापुर अपने देश में कानून-व्यवस्था, सामाजिक समरसता और नस्लीय व धार्मिक सद्भाव के मामलों में दुनिया भर में अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति के लिए जाना जाता है। जब सिंगापुर के साइबर सेल और पुलिस विभाग के पास इन भारत-विरोधी और नफरती पोस्ट्स की शिकायतें पहुंचीं, तो उन्होंने बिना किसी देरी के मामले की तह तक जाने का फैसला किया। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंगापुर की धरती या उसके नेटवर्क का इस्तेमाल करके किसी भी देश, समुदाय या उसकी आपदा के नाम पर द्वेष और नफरत फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जांच एजेंसियों ने उन तमाम सोशल मीडिया अकाउंट्स, आईपी एड्रेस और यूजर्स की पहचान करना शुरू कर दिया है जिन्होंने इस शातिर एजेंडे के तहत भ्रामक और जहर उगलने वाली सामग्री प्रसारित की थी। सिंगापुर के कड़े कानूनों के तहत इन आरोपियों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है, जिसके तहत उन्हें भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही डिजिटल नफरत और प्रोपेगेंडा की चुनौती
आज के इस आधुनिक डिजिटल युग में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक बड़ा माध्यम तो बना ही है, लेकिन साथ ही यह असामाजिक तत्वों के लिए नफरत फैलाने और समाज को बांटने का सबसे खतरनाक हथियार भी बन चुका है। नेपाल जैसी गंभीर त्रासदी के वक्त भी जब लोग अपनों को खोने के गम से जूझ रहे थे, तब कुछ लोगों द्वारा इस तरह की ओछी हरकतें करना यह साबित करता है कि उनकी मानसिकता कितनी गिर चुकी है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर भारत के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक स्तर पर उसकी सकारात्मक छवि से बौखलाए कुछ लोग अक्सर इस तरह के छद्म अभियानों का सहारा लेते हैं। सिंगापुर सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम इस बात का प्रमाण है कि अब दुनिया भर के देश सोशल मीडिया पर फैलने वाले इस जहर को लेकर पूरी तरह से गंभीर हो चुके हैं और वे ऐसे तत्वों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने में जरा भी कोताही नहीं बरत रहे हैं।
आधुनिक एआई सर्च और ग्लोबल मीडिया के दौर में फेक न्यूज पर लगाम
आज के इस आधुनिक जेनेरेटिव एआई सर्च और सोशल मीडिया के दौर में किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर सेकंडों में फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा फैलाया जा सकता है। गूगल डिस्कवर और बिंग जैसे आधुनिक सर्च इंजन यूजर की जिज्ञासा और विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की भ्रामक खबरों और नफरती अभियानों पर नजर रखते हैं। पाठकों के बीच यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ चलने वाले षड्यंत्रों को अब विदेशी सरकारें खुद संज्ञान लेकर कुचल रही हैं। सिंगापुर में शुरू हुई यह पुलिस जांच इस बात का एक मजबूत उदाहरण है कि इंटरनेट पर कुछ भी लिखने से पहले लोगों को उसके कानूनी परिणामों के बारे में सोच लेना चाहिए। आपदा के समय राजनीति और नफरत का यह खेल खेलने वाले इन तत्वों के खिलाफ हुई यह कार्रवाई आने वाले समय में डिजिटल स्पेस में एक बड़ा सबक साबित होगी।