कोरोना महामारी में बुजुर्गों का सहारा बन रही योगी सरकार, जानें कैसे कर रही मदद

बुजुर्गों की चिंता करना, वक्त पर उनको इलाज दिलाना साथ ही साथ भावनात्मक सहयोग देने का काम पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

लखनऊ॥ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘एल्डरलाइन’ प्रोजेक्ट कोविड आपदा में बुजुर्गों के लिये सहारा बन गई है। बेटी ने घर में आने से मना किया तो हेल्पलाइन नंबर पर फोन आने से एल्डरलाइन की टीम ने महेश कुमार रस्तोगी नामक बुजुर्ग की सहायता की।

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ये कोई एक उदाहरण नहीं है, बल्कि कई हैं। यहां अपनों से बिछड़े और सड़क व फुटपाथ पर जीवन बिताने को मजबूर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।

मंगलवार को राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रोजेक्ट एल्डरलाइन के अंतर्गत टोल मुफ्त हेल्पलाइन नंबर- 14567 जारी किया गया है। इस नम्बर पर जानकारी मिलने पर ऐसे अनेक लोगों की रोज सहायता की जा रही है। बुजुर्गों की चिंता करना, वक्त पर उनको इलाज दिलाना साथ ही साथ भावनात्मक सहयोग देने का काम पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में यह सुविधा 14 मई से लागू की गई है। प्रत्येक दिन विभिन्न जनपदों से जरूरतमंदों के 80 से 90 फोन आ रहे हैं। सुबह आठ बजे से शाम के आठ बजे तक कॉल सेंटरों के माध्यम से बुजुर्गों की सहायता की जा रही है।

टोल फ्री हेल्पलाइन पर फिजियोथेरेपी, स्वास्थ्य संबंधी, मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं और शिकायतों के साथ कानूनी मुद्दों पर जानकारी के लिये आने वाले प्रश्नों का त्वरित समाधान भी किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को टाटा ट्रस्ट्स और एनएसई फाउंडेशन की सहायता से संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कासगंज में भूख से तड़प रही बुजुर्ग महिला को ओल्ड ऐज होम पहुंचाया गया। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर महिला की दुर्दशा की जानकारी लोगों ने दी, जिसके बाद मौके पर पहुंचे फील्ड रिस्पोंस लीडर ने पुलिस और तहसीलदार की सहायता से बुजुर्ग महिला को ओल्ड ऐज होम में पहुंचाया।

इसी तरह चंदौसी बस अड्डे पर डेढ़ महीने से बेहाल पड़े पूर्व सैनिक को उत्तराखंड उसके घर पहुंचाया गया। उत्तराखंड के खटीमा से चंदौसी अपनी बेटी से मिलने आए बुजुर्ग को बेटी ने घर में आने से मना कर दिया, जिसके बाद वो चंदौसी बस पर ही पड़े रहे। हेल्पलाइन पर फोन आने के बाद एल्डरलाइन की टीम ने उनकी सहायता की। बुजुर्ग व्यक्ति पूर्व सैनिक रहे हैं और उन्होंने अपना नाम महेश कुमार रस्तोगी बताया।

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