कायदे-क़ानून को ताक पर योगी सरकार में हुए तबादले, अब आमने-सामने हैं मंत्री और अफसर

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यूपी किरण ब्यूरो

लखनऊ।। खाद्य विभाग में नियम विरुद्ध तबादलों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर, इस मामले पर उत्तर प्रदेश खाद्य तथा रसद राजपत्रित मार्केटिंग संघ के नेता आमने-सामने आ गए हैं।

वहीं खाद्य आयुक्त ने सभी संभागीय खाद्य नियंत्रकों से किये गए तबादलों का ब्यौरा तलब किया है।

खाद्य तथा रसद राजपत्रित मार्केटिंग संघ के महामंत्री धनन्जय सिंह ने 3 जुलाई को खाद्य आयुक्त से शिकायत की थी कि मण्डल स्तर पर क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों में तय प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन किया गया।

संबंधित जिला खाद्य विपणन अधिकारी के प्रस्ताव के बिना ही सीधे विपणन निरीक्षक और दूसरे कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। खाद्य आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए ऐसे सभी नियम विरूद्ध आदेशों को निरस्त करने और इसकी पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए कड़े निर्देश भी जारी करने की मांग की थी।

अध्यक्ष-महामंत्री आमने-सामनेइस मुद्दे पर खाद्य तथा रसद राजपत्रित मार्केटिंग संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने महामंत्री धनन्जय सिंह को पत्र लिख कर नाराजगी जताई है।

अध्यक्ष का कहना है कि पत्र लिखने से पहले इस पर कार्यकारिणी या सामान्य सभा की बैठक बुला कर कोई चर्चा नहीं की गई। अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों की सहमति नहीं ली गई।

उन्होंने तत्काल कार्यकारिणी की बैठक बुला कर इस बारे में गाइड लाइन बनाने की बात कही है और महामंत्री से तब तक कोई पत्र न लिखने के लिए कहा है। अध्यक्ष ने खाद्य आयुक्त को पत्र लिख कर महामंत्री के पत्र का संज्ञान न लेने के लिए कहा है।

उधर, महामंत्री धनन्जय सिंह का कहना है कि शीघ्र ही संघ की आम सभा की बैठक बुलाई जाएगी। कुछ विभागीय आरएफसी द्वारा आदेश की इस प्रकार अवहेलना से संघ में यह असहज स्थिति उत्पन्न हुई है।

इससे डिप्टी आएमओ संवर्ग में आक्रोश व्याप्त है। नियम विरूद्ध तबादलों के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा।

राज्य मुख्यालय कारागार विभाग में हुए अफसरों के तबादले पर सवाल उठने लगा है। एक तरफ जहां पदोन्नति के बाद वरिष्ठ अधीक्षकों को मंडलीय जेलों की कमान न मिलने से मायूसी है तो दूसरी तरफ तय प्रतिशत से ज्यादा तबादलों से भी रोष है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि शासन की नीति के अनुसार 20 प्रतिशत तबादले किए जाने थे लेकिन कुल तबादले 80 प्रतिशत से ज्यादा हो गए हैं। इसी तरह वरिष्ठ अधीक्षक पद पर प्रोन्नत हो चुके जेल के अधिकारियों को फिर से जिला जेलों की ही कमान दे दी गई है।

ऐसी परंपरा है कि वरिष्ठ अधीक्षकों को मंडलीय जेल या सेंट्रल जेल की कमान दी जाती है लेकिन तबादलों में इसका कोई ध्यान नहीं रखा गया।

वर्ष 2015 में ही वरिष्ठ अधीक्षक पद पर प्रोन्नत हो चुके अरविन्द कुमार सिंह को फतेहपुर जिला जेल से महराजगंज जिला जेल के अधीक्षक पद पर स्थानान्तरित कर दिया गया। अरविन्द सिंह के बारे में बताया जाता है कि वह राष्ट्रपति पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।

इसी तरह सुलतानपुर से रायबरेली स्थानान्तरित किए गए प्रमोद कुमार शुक्ला को वरिष्ठ अधीक्षक पद पर प्रोन्नति मिल जाने के बाद भी दोबारा जिला जेल में तैनाती दी गई है। उन्हें अब रायबरेली जिला जेल की कमान सौंपी गई है।

इसके विपरीत कारागार मुख्यालय में अधीक्षक पद पर तैनात रहे रामधनी को मंडल कारागार गोरखपुर की कमान दी गई है और मंडल गोरखपुर के वरिष्ठ अधीक्षक रहे एसके शर्मा को अब बलरामपुर स्थानान्तरित कर दिया गया है।

विभागीय अफसरों का कहना है कि शासन से वरिष्ठ अधीक्षक के कुल 21 पद सृजित हैं लेकिन वर्तमान में केवल 16 वरिष्ठ अधीक्षक ही कार्यरत हैं। इन सभी को आसानी से मंडलीय या सेंट्रल जेल में तैनाती दी जा सकती है। बावजूद इसके तैनाती में वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा गया है।

फोटोः फाइल

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