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पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम की नजर में रेलवे का प्रबंधन इस समय बिल्कुल फेल हो चुका है। उन्होंने ट्विटर पर संदेशों की एक पूरी श्रृखला पोस्ट करते हुए उनमें कहा कि राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर की भूमिका निभाने वाले रेलवे का संचालन अनुपात उसके कामकाज का प्रत्यक्ष संकेतक होता है, जो इस बार व्यापक विफलता की तरफ इशारा कर रहा है। उन्होंने संचालन अनुपात के आंकड़ों को आधार बनाते हुए सवाल पूछा कि  2017-18 वित्त वर्ष में रेलवे का संचालन अनुपात क्या रहा है और क्या इसके आंकड़े हालिया सालों में सबसे खराब रहे हैं?उन्होंने कहा, क्या ये सही है कि वास्तविक संचालन अनुपात 100 प्रतिशत को पार कर गया है? उन्होंने ट्विटर पर ये लिखते हुए फिर अगला सवाल किया, क्या ये भी सच है कि संचालन अनुपात को 100 प्रतिशत से कम दिखाने के लिए खातों को ‘तैयार’ (गड़बड़) किया जा रहा है? पूर्व गृहमंत्री व वित्त मंत्री ने कहा, यदि संचालन अनुपात 100 प्रतिशत के करीब या उससे ज्यादा रहता है तो ये भारतीय रेलवे के प्रबंधन की व्यापक विफलता का संकेत है।

18 साल का सबसे खराब अनुपात

कुछ रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे का संचालन अनुपात, जो सरकारी ट्रांसपोर्टर के कामकाज के स्तर का प्रत्यक्ष संकेतक है, 2017-18 के लिए 98.5 प्रतिशत रह सकता है। ये पिछले 18 साल यानि वर्ष 2000-2001 से अब तक का सबसे खराब संकेतक होगा। वर्ष 2000-2001 में संचालन अनुपात 98.3 रहा था।

क्या है कारण

एक रेलवे अधिकारी के अनुसार, 7वां वेतन आयोग लागू होने पर रेलवे के खर्च में भत्तों और पेंशन के मद में हुई बढ़ोतरी के कारण संचालन अनुपात का आंकड़ा उछला है। बता दें कि संचालन अनुपात का अर्थ ये होता है कि रेलवे एक रुपया कमाने के लिए कितना खर्च करती है।

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