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Up Kiran, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है कि इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियां क्यों नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि यह मामला इतने बड़े पैमाने पर फैला हुआ है कि इसमें जांच की जरूरत है, लेकिन यह केवल चुनावी राज्यों तक ही सीमित क्यों है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोडीन रैकेट से जुड़े लोग अरबों रुपये की संपत्ति बना चुके हैं, लेकिन इस मामले में न तो सीबीआई और न ही ईडी कोई ठोस कार्रवाई कर रही है।

क्या सिर्फ चुनावी राज्यों में कार्रवाई हो रही है?
अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर यह मामला इतना गंभीर है, तो फिर चुनावी राज्यों में ही छापेमारी और जांच क्यों की जा रही है? उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्यों राज्य में फैले इस काले धंधे पर कोई केंद्रीय एजेंसी कार्रवाई नहीं कर रही। उनका आरोप है कि विपक्षी दलों को निशाना बनाना और चुनावी रणनीतियों को प्रभावी बनाना सरकार की प्राथमिकता बन गई है, जबकि बड़े अपराधी खुलेआम अपना कारोबार चला रहे हैं।

सपा और भाजपा के बीच आरोपों का सिलसिला
कोडीन कफ सिरप के अवैध व्यापार को लेकर भाजपा और सपा के बीच तीखी जुबानी जंग जारी है। इस मुद्दे पर विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ था। सपा के विधायक इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में, सपा ने इस मामले को जोरशोर से उठाया और प्रदेश सरकार पर आरोप लगाए कि वह भ्रष्टाचार में लिप्त है और बड़े माफियाओं से संबंध रखती है।

मुख्यमंत्री ने सपा को दिया जवाब
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं के नाम भी इस रैकेट में आ सकते हैं। उन्होंने कहा, "जांच चल रही है, दूध का दूध और पानी का पानी सब सामने आएगा।" मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने अब तक इस मामले में 79 FIR दर्ज की हैं, 225 लोगों को नामजद किया है, और 78 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही, 134 कंपनियों पर छापेमारी की गई है।

माफिया से जुड़े संबंधों की जांच
योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि इस रैकेट के तार समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि एसटीएफ की जांच से यह साफ हो जाएगा कि इस गिरोह के लेन-देन में किस-किस का नाम सामने आता है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस मामले में माफियाओं के साथ सपा के नेताओं के रिश्ते उजागर हो सकते हैं, और यह सब कुछ जल्द ही सार्वजनिक हो जाएगा।