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Up Kiran,Digital Desk: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के निर्माण और साज-सज्जा में कुछ विशेष दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद आवश्यक होता है। अगर इन नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। वहीं, वास्तु दोष के कारण घर में आर्थिक संकट, मानसिक तनाव, और कई प्रकार की परेशानियाँ आ सकती हैं।

मेन गेट की दिशा: सुख-शांति की कुंजी

वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर का मुख्य प्रवेश द्वार (मेन गेट) अगर उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर दिशा में स्थित हो तो यह घर में सकारात्मकता और समृद्धि लाने में सहायक होता है। इन दिशाओं में स्थित मुख्य द्वार घर में सुख, शांति, और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति कराता है। यही कारण है कि वास्तु विशेषज्ञ घर के मेन गेट की दिशा पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।

धन और समृद्धि के द्वार: उत्तर दिशा की महत्ता

उत्तर दिशा को खासतौर पर धन के देवता कुबेर और लक्ष्मी माता की दिशा माना जाता है। यदि आपके घर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा की ओर है तो यह आपके लिए वित्तीय समृद्धि और तरक्की के दरवाजे खोलता है। इस दिशा में स्थित गेट से घर में लक्ष्मी और कुबेर की कृपा हमेशा बनी रहती है, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें

घर के मेन गेट को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। इस दिशा में किसी भी प्रकार का कचरा या गंदगी न फेंके, क्योंकि यह वास्तु के दृष्टिकोण से शुभ नहीं होता। इस दिशा में बाथरूम, भारी सामान या जूते-चप्पल रखने से बचें, क्योंकि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है।

ईशान कोण: धार्मिक स्थान का महत्व

वास्तु के अनुसार उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को घर के लिए शुभ माना गया है। इस दिशा में घर का मंदिर या पूजा स्थल बनाना सबसे लाभकारी होता है। यहां देवी-देवताओं का स्थान होना घर के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे घर में शांति और आशीर्वाद बना रहता है।

पश्चिम दिशा का प्रभाव: यश और धन का आगमन

इसके अलावा, पश्चिम दिशा को भी घर के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु के अनुसार, अगर घर का मेन गेट पश्चिम दिशा में है तो यह घर में यश और सम्मान के साथ-साथ धन-धान्य की वृद्धि करता है।