img

UP Kiran,Digital Desk: अमेरिका द्वारा बार-बार प्रयास करने के बावजूद, भारत और रूस के रिश्ते में कोई खास कमी नहीं आई है। जबकि एक ओर भारत को रूस से सस्ता तेल मिल रहा है, वहीं अब रूस ने भारतीयों के लिए एक नई दिशा तय की है, जो उनके भविष्य को एक नया मोड़ दे सकता है। रूस, जो इस समय गंभीर श्रमिक संकट का सामना कर रहा है, भारतीय कामकाजी लोगों के लिए अनगिनत अवसरों का द्वार खोलने जा रहा है।

रूस में कामकाजी भारतीयों की बढ़ती मांग

यूक्रेन युद्ध, गिरती जनसंख्या और यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण रूस में श्रमिकों की भारी कमी हो गई है। पहले रूस इन कमी को मध्य एशियाई देशों से पूरा करता था, लेकिन अब रूस का ध्यान भारत पर है। रूस के विभिन्न शहरों, विशेष रूप से मॉस्को में, भारतीय कामकाजी लोगों की संख्या बढ़ने वाली है।

बर्फ हटाने से लेकर बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक, हर जगह भारतीय श्रमिकों की ज़रूरत महसूस की जा रही है। रेस्टोरेंट इंडस्ट्री हो या वेल्डिंग और तकनीकी सेक्टर, अब इन क्षेत्रों में भी भारतीय कामकाजी लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

द्विपक्षीय समझौतों ने अवसर को और बढ़ाया

रूस और भारत के बीच दिसंबर में हुए द्विपक्षीय समझौते अब भारतीय श्रमिकों के लिए नए दरवाजे खोलने जा रहे हैं। इन समझौतों के तहत रूस ने हजारों भारतीय नागरिकों को वर्क परमिट देने की योजना बनाई है। यह संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले कई गुना बढ़ने की संभावना है, जब रूस ने भारतीयों को रिकॉर्ड वर्क परमिट दिए थे।