Up kiran,Digital Desk : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को आदिशंकराचार्य की संपूर्ण ग्रंथावली (गुजराती संस्करण) का विमोचन किया और शंकराचार्य के जीवन‑कार्य की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सनातन धर्म की पहचान को मजबूत किया और इसे चारों दिशाओं में फैलाया।
शाह ने समारोह में बताया कि यह ग्रंथावली 15 खंडों में प्रकाशित की गई है और इससे खासकर युवाओं को शंकराचार्य के विचारों और उनके ज़माने के सामाजिक प्रश्नों के उत्तरों को समझने में मदद मिलेगी। वेदांत के आठवीं सदी के विद्वान ने अपनी पैदल यात्राओं के दौरान देश के कोने‑कोने में ज्ञान के केंद्र स्थापित किए और वहां अध्ययन‑परंपरा को आगे बढ़ाया।
उनका कहना था कि शंकराचार्य सिर्फ धार्मिक विचार नहीं फैलाते थे, बल्कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और ज्ञान की परंपरा का स्वरूप भी निर्धारित किया। उन्होंने चारों दिशाओं में मठों का निर्माण किया और वेदों का संरक्षण सुनिश्चित किया, ताकि ज्ञान स्थायी रूप से संरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।
शाह ने यह भी कहा कि शंकराचार्य ने उन सभी बौद्धिक प्रश्नों का जवाब दिया जो उस समय के समाज में उठते थे, चाहे वे बौद्ध, जैन, कपालिक या तांत्रिक विचारधाराओं से जुड़े हों। उनके विचारों से लोगों को जीवन, धर्म और मोक्ष के मार्ग पर स्पष्ट दिशा मिलती है।
ग्रंथावली का प्रकाशन सास्तु साहित्य मुद्रालय ट्रस्ट द्वारा संपादक गौतम पटेल के नेतृत्व में किया गया है और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की गहराई को दर्शाता है।

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