
उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के प्रदेश महासचिव शाहजेब रिजवी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनका यह कदम पार्टी द्वारा संसद में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का समर्थन करने के विरोध में आया है। रिजवी ने न सिर्फ अपने पद से इस्तीफा दिया बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के उस रुख से नाराज़गी के कारण लिया गया, जिसमें उन्होंने एनडीए के समर्थन में वक्फ बिल का साथ दिया।
"जयंत चौधरी ने मुस्लिम मतदाताओं को नजरअंदाज किया"
शाहजेब रिजवी ने जयंत चौधरी पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि वक्फ बिल के समर्थन से उन्होंने मुस्लिम समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है। उनका कहना था कि अगर आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आरएलडी के पास 10 विधायक हैं, तो उसमें मुसलमानों की बड़ी भूमिका है। रिजवी ने कहा, "जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने उस समुदाय को धोखा दिया है जिसने उन्हें चुनाव में मजबूत समर्थन दिया।"
भविष्य की रणनीति पर विचार जारी
हालांकि शाहजेब रिजवी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह आगे किस राजनीतिक दल में जाएंगे, लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि वे अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके साथ आरएलडी के दो हजार से अधिक कार्यकर्ता इस्तीफा देने को तैयार हैं।
वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में जोरदार बहस
शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा में यह विधेयक 13 घंटे से ज्यादा चली बहस के बाद पारित हुआ, जिसमें 128 सांसदों ने इसके पक्ष में और 95 ने इसके खिलाफ मतदान किया। लोकसभा में यह बिल एक दिन पहले ही पारित हो चुका था, जहां 288 सांसदों ने समर्थन किया और 232 ने विरोध में वोट डाले।
विवाद क्यों खड़ा हुआ?
वक्फ बिल को लेकर मुसलमानों में विशेष चिंता इस बात को लेकर है कि यह उनके धार्मिक स्थलों और संपत्तियों के प्रबंधन पर असर डाल सकता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के रवैये को लेकर समुदाय में असंतोष है। आरएलडी जैसे दलों से मुस्लिम समुदाय को पारंपरिक समर्थन मिला है, इसलिए जब पार्टी ने इस बिल का समर्थन किया, तो इसे समुदाय की भावनाओं के खिलाफ माना गया।
आरएलडी के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियाँ
शाहजेब रिजवी का इस्तीफा पार्टी के लिए एक गंभीर संकेत हो सकता है। उत्तर प्रदेश में मुसलमान आरएलडी के एक प्रमुख मतदाता वर्ग रहे हैं, खासकर पश्चिमी क्षेत्रों में। अगर यह असंतोष बढ़ता है और अन्य नेता भी रिजवी के साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो आगामी चुनावों में आरएलडी को मुस्लिम मतों की क्षति झेलनी पड़ सकती है।
यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को किस दिशा में मोड़ता है, इस पर सबकी नजरें रहेंगी। साथ ही यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या शाहजेब रिजवी किसी नए राजनीतिक मंच से जुड़ते हैं या कोई स्वतंत्र रास्ता अपनाते हैं।
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