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Up Kiran, Digital Desk: मां का दूध छोटे बच्चों के लिए सबसे उत्तम आहार होता है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे स्तनपान से धीरे-धीरे हटाकर ठोस आहार पर लाना जरूरी हो जाता है। ब्रेस्टफीडिंग की प्रक्रिया केवल शारीरिक पोषण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह एक ऐसे अहम बदलाव का हिस्सा है, जिसे माता-पिता को समझदारी से और धैर्य से संभालने की आवश्यकता होती है।

ब्रेस्टफीडिंग को अचानक बंद करना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

कई बार माता-पिता जल्दीबाजी में और बिना सही जानकारी के बच्चे को स्तनपान से हटा देते हैं, जो कि बच्चे के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से असहज कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह जल्दीबाजी बच्चे में चिड़चिड़ापन और बेचैनी पैदा कर सकती है, जिससे बच्चा असुरक्षित महसूस करता है।

ब्रेस्टफीडिंग छोड़ने में समय क्यों लगता है?

बच्चे को स्तनपान से हटाना कोई आसान प्रक्रिया नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि ब्रेस्टफीडिंग से न केवल पोषण मिलता है, बल्कि यह मां और बच्चे के बीच एक गहरा भावनात्मक संबंध भी स्थापित करता है। इस संबंध के कारण बच्चे को यह आदत जल्दी नहीं छोड़ पाता और अचानक बदलावों से वह परेशान हो सकता है। इसलिए इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे और सही तरीके से करना बहुत जरूरी है।

क्या बच्चे को दूध से अलग करने के लिए कड़वी चीजों का उपयोग करना सही है?

कई माता-पिता यह समझते हैं कि यदि स्तन पर कड़वी चीजें जैसे नीम, करेले का रस या नेल पेंट लगाया जाए तो बच्चा ब्रेस्टफीडिंग छोड़ देगा। लेकिन यह तरीका गलत साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के उपाय बच्चे में डर पैदा कर सकते हैं, और यह मां-बच्चे के रिश्ते को भी प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, इससे ब्रेस्टफीडिंग की आदत छूटने के बजाय और मजबूत हो सकती है।

अचानक ब्रेस्टफीडिंग बंद करने से क्या होता है?

बहुत से माता-पिता यह सोचते हैं कि बच्चे को एक दिन में ब्रेस्टफीडिंग छोड़कर, या अचानक दूध बंद कर, यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। लेकिन यह तरीका सही नहीं है। इससे बच्चे में तनाव और असहजता बढ़ती है, और वह पहले से ज्यादा दूध की मांग करने लगता है। इसलिए, बच्चों को इस बदलाव के लिए समय देना और धीरे-धीरे इसे लागू करना बेहद महत्वपूर्ण है।

ब्रेस्टफीडिंग छोड़ने का सही तरीका

अगर आप अपने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग से हटाना चाहती हैं, तो यह जरूरी है कि आप इस प्रक्रिया को धैर्य और समझदारी से अपनाएं। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, निम्नलिखित उपायों से यह प्रक्रिया सहज और सुरक्षित हो सकती है:

धैर्य और परिवार का समर्थन: बच्चे के लिए यह एक बदलाव है, इसलिए इसे धीरे-धीरे और सही तरीके से करना जरूरी है। इस दौरान परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण होता है।

बच्चे को धीरे-धीरे अलग सुलाना: शुरुआत में बच्चे को कुछ घंटे के लिए अपने से अलग सुलाने की आदत डालें। इससे बच्चा मानसिक रूप से तैयार होता है और ब्रेस्टफीडिंग की आदत छोड़ने में आसानी होती है।

रात में हल्का भोजन: रात को बच्चे को दूध की जगह पानी या हल्का फूड देने की आदत डालें।

बच्चे को व्यस्त रखें: बच्चे को खेल, प्यार और बातचीत से व्यस्त रखने से उसका ध्यान भटकता है, और वह दूध की मांग नहीं करता।

आदत बदलना जरूरी है: कई बार बच्चा भूख से नहीं, बल्कि आदत के कारण दूध पीता है, इसलिए आदत को बदलने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।