Up Kiran,Digital Desk: राजस्थान के डूंगरपुर जिले के आदिवासी समुदाय ने एक महापंचायत के माध्यम से पुराने रिवाजों में बदलाव लाकर समाज में एक नई मिसाल पेश की है। साबला और आसपुर क्षेत्र के 14 गांवों के आदिवासी समाज ने ओडा गांव में आयोजित इस पंचायत में जीवनशैली में सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इन फैसलों का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि लोग दिखावे और अनावश्यक खर्चों से बच सकें।
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश
इन फैसलों का मुख्य कारण वर्तमान में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों को समझा जा सकता है। सराफा बाजार में सोने का भाव 1.72 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव आ रहा था। इसे देखते हुए, पंचायत ने निर्णय लिया कि अब विवाहों में सोने के आभूषणों का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही चांदी के आभूषणों का वजन भी अधिकतम 50 ग्राम तक सीमित किया गया है।
शादी-ब्याह में दिखावे की संस्कृति पर रोक
समाज में फैली हुई फिजूलखर्ची और दिखावे की संस्कृति को खत्म करने के लिए पंचायत ने कड़े कदम उठाए। अब शादी-ब्याह में कपड़ों के अलावा किसी भी तरह के लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। 'मामेरा' की रस्म के अलावा किसी भी अतिरिक्त लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।
ध्वनि प्रदूषण और अनावश्यक खर्चों पर सख्त रोक
सामाजिक आयोजनों में डीजे का उपयोग और अन्य अनावश्यक खर्चों पर भी पाबंदी लगा दी गई है। पंचायत ने स्पष्ट किया कि अब विवाह जैसे समारोहों को एक सादगीपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाएगा, न कि किसी तमाशे के रूप में।
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