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Up kiran,Digital Desk : देश की सर्वोच्च अदालत ने वैवाहिक संबंधों और कानूनी जवाबदेही को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी (पति या पत्नी) के विवाहेतर संबंधों (Extra Marital Affair) के कारण तनाव में आकर आत्महत्या कर लेता है, तो इसे कानूनन 'आत्महत्या के लिए उकसाने' (Abetment to Suicide) का अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें आरोपी प्रेमी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी।

धारा 306 और 'उकसावे' की कानूनी परिभाषा

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप के लिए दो चीजें बेहद जरूरी हैं:

स्पष्ट इरादा (Mens Rea): आरोपी की मंशा होनी चाहिए कि वह मृतक को आत्महत्या के लिए मजबूर करे।

प्रत्यक्ष योगदान: आरोपी ने कोई ऐसा सक्रिय कदम उठाया हो जिससे मृतक के पास अपनी जान लेने के अलावा कोई अन्य विकल्प न बचे।

अदालत ने कहा कि केवल अवैध संबंध होना 'आपराधिक मंशा' के समान नहीं है।

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि मृतक अपनी पत्नी के कथित प्रेम संबंधों की वजह से मानसिक तनाव में था। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि पत्नी के प्रेमी द्वारा मृतक का अपमान किया जाना उकसावे के बराबर है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो साबित करे कि अपीलकर्ता (पत्नी के प्रेमी) ने मृतक को अपनी जान लेने के लिए प्रेरित किया था या किसी अवैध कृत्य के जरिए उसकी मदद की थी।

'सकारात्मक कृत्य' और घटना का समय

अदालत ने अपने फैसले के सार में स्पष्ट किया कि:

उकसावे के लिए 'सकारात्मक कृत्य' (Positive Act) का होना अनिवार्य है।

यह कृत्य आत्महत्या की घटना के समय के बिल्कुल करीब होना चाहिए, ताकि दोनों के बीच एक सीधा संबंध स्थापित किया जा सके।

मानसिक पीड़ा या तनाव, जो किसी के अवैध संबंधों की जानकारी से पैदा हुआ हो, उसे कानूनी रूप से 'उकसावा' नहीं कहा जा सकता।

सह-आरोपी पत्नी के खिलाफ चलता रहेगा मामला

विशेष बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह राहत केवल अपीलकर्ता (पत्नी के प्रेमी) को दी है। चूंकि मृतक की पत्नी भी इस मामले में सह-आरोपी है और उसने अदालत में अपने खिलाफ चल रहे ट्रायल को चुनौती नहीं दी थी, इसलिए उसके विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी।